कांटे क्षेत्र के भुजैनी चौराहे पर स्थित एक प्राइवेट आईटीआई कॉलेज के छात्रों ने सोमवार को कॉलेज गेट पर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि कैंपस चयन के नाम पर उनके साथ फ्रॉड किया गया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कॉलेज से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सूचना पर पहुंचे चौकी इंचार्ज ने ने छात्रों को समझा बुझा कर शांत कराया।
छात्र श्याम नरायन ,गुलाब चंद्र ,सूरज कुमार ,राकेश कुमार ,अजय,संदीप, श्रवण,राम शंकर, मनोज ,नीरज ,पवन ,विकास, सुनील आदि का आरोप था कि वर्ष 2014 में भुजैनी में चैतन्य भारत आईटीआई कॉलेज खुला था। जिसमें आस-पास के रहने वाले छात्रों ने भी प्रवेश लिया। अगस्त 2016 में फाइनल परीक्षा हुई। जिसका परिणाम अभी नहीं आया है।
इसी बीच अहमदाबाद की कुछ कंपनियां से जुड़े कुछ लोग कॉलेज आए और छात्रों का कैंपस सलेक्शन किया। आरोप है कि कॉलेज के डॉयरेक्टर संजय प्रकाश गर्ग और मैनेजर विजेंद्र यादव उर्फ बिल्लू के जरिए छात्रों को 20 अगस्त को नौकरी ज्वाइन करने के लिए अहमदाबाद भेजा गया। आरोप है कि जिन कंपनियों में चयन की बात कही गई थी वहां जाने पर पता चला कि उनका चयन ही नहीं हुआ है। वहां के ठेकेदार लोग छात्रों को दूसरी जगह ले गए और प्रत्येक छात्रों से एक-एक हजार रुपये लिए। रकम लेने के बाद ठेकेदार का पता नहीं चला। चयन करने आए लोगों का भी पता नहीं चला।
रकम न होने के कारण कई छात्रों को वापस लौटने में खासी दिक्कत हुई। वे लोग किसी तरह घर लौटे। इन छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की। सूचना पर चौकी इंचार्ज पहुंचे तो उन्हें तहरीर भी दी। उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनी और हालत को देखते हुए सभी छात्रों को फल और खाने के लिए सामान मंगवाया। चौकी इंचार्ज ने बताया कि चैतन्य भारत आईटीआई कॉलेज के डायरेक्टर संजय प्रकाश गर्ग ने पूछताछ में बताया कि अहमदाबाद गए छात्रों ने वहां इंतजार नहीं किया।
उनका मेडिकल परीक्षण होना था। जल्दबाजी में छात्र कंपनी से संतुष्ट नहीं होने की वजह से वापस चले आए। वैसे छात्रों की तहरीर कोतवाल को दे दी गई है। कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं मैनेजर विजेंद्र यादव उर्फ बिल्लू ने बताया कि अहमदाबाद की तीन कंपनियां आईं थी। उन्होंने 62 छात्रों का चयन किया था। इसमें से 40 छात्र वहां गए। इन लोगों का मेडिकल परीक्षण व कुछ अन्य औपचारिकताएं पूरी होनी थी, लेकिन ये लोग वहां नहीं रुके। छात्रों से कमरे के किराए के लिए एक-एक हजार रुपये मांगे गए थे, लेकिन छात्रों ने रकम नहीं दी। छात्रोें के सभी आरोप बेबुनियाद हैं।