कृष्णा और बलिराम के सिर से मां-बाप का साया उठ गया।
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सेवहा चौबे गांव में दंपति और मासूम बच्ची की मौत से समूचा क्षेत्र दहल उठा। जिसने वाकया सुना वह हतप्रभ हो गया। हर किसी ने यही कहा कि मां-बाप के विवाद में मासूम भाइयों का भविष्य अंधकार मय हो गया। जबकि बुजुर्ग अपाहिज बूढ़े पिता का सहारा भी छिन गया।
60 वर्षीय शीतल रोते हुए बताते है कि उनका भरापूरा परिवार था। चारों बेटियों की शादी कर दी थी और सब अपने-अपने घर रह रही हैं। इधर इकलौते बेटे राम रतन और बहू पूनम के बीच संबंध ठीक नहीं था। जिसका असर छोटे सात वर्षीय पौत्र कृष्णा, चार वर्ष के बलिराम पर पड़ रहा था। नौ माह की नातिन दीया मां की गोद में थी। बेटा राम रतन शराब पीने का आदि हो गया था।
छोटी- छोटी बात पर बेटे-बहू का झगड़ना परिवार में कलह का कारण बन गया था। समझाने पर भी दोनों नहीं समझे। यही वजह था कि बहू अधिक समय मायके में रहती थी। गुरुवार को घुमा कर बेटा मायके से बहू को लेकर घर आया था। भोर में जब बेटा रामरतन बाहर आया तो बहू को अपशब्द बोलते हुए कहा कि उसने पत्नी और बेटी को मार डाला। यही नहीं विवाद के बहू ने भी उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। उपचार के दौरान रामरतन की भी मौत हो गई। दोनों पौत्र मासूम हैं, किसके सहारे बुढ़ापा कटेगा।
मासूम बलिराम ने भी यही बताया कि मम्मी- पापा झगड़ते थे। पूनम के पिता रामकिशोर ने पोस्टमार्टम हाउस पर रोते हुए यही बताया कि चार बेटियों और तीन बेटों में पूनम सबसे बड़ी थी। उसका बड़ा बेटा कृष्णा उनके घर पर ही रहता था। बेटी-दामाद तो रहे नहीं लेकिन दोनों मासूम बच्चों का भविष्य भी बर्बाद कर गए।