लाइसेंसी असलहा लेकर प्राथमिक स्कूलाें में आना जिले के कुछ शिक्षक अपनी शान समझते हैं। इन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है बच्चों पर इसका क्या असर पड़ेगा। कलम की जगह असलहा रखना ऐसे लोगों की फितरत है। अपराधियों जैसे रसूख के चलते अधिकारी भी ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई करने से बचते हैं। जबकि शासनादेश के अनुसार कोई भी शिक्षक विद्यालय पर असलहा लेकर नहीं आ सकता है।
जानकारी अनुसार जनपद में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने इन दिनों लाइसेंसी असलहा रखना शौक बन गया है। सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 100 से अधिक शिक्षक है जो लाइसेंसी असलहा लेकर विद्यालय आते है। बस्ती जनपद में एक वर्ष पूर्व एक विद्यालय में शिक्षक लाइसेंसी असलहा लेकर आए थे और उसे वही साफ कर रहे थे कि उसी दौरान गोली चल गई और एक छात्रा की मौत हो गई। उसके बाद काफी हंगामा हुआ था।
इसके साथ ही अन्य कई जनपदों में घटना हो चुुकी है। विभागीय सूत्रों की माने तो बेसिक शिक्षा निदेशक का फरमान है कि कोई भी शिक्षक विद्यालय पर असलहा लेकर नहीं आएगा। अगर वह विद्यालय असलहा लेकर आता है तो उस पर कार्रवाई की जाए, पर विभाग निदेशक के फरमान को असली जामा नहीं पहना पा रहा है। अधिकारी भी दबंग शिक्षकों पर कार्रवाई करने से डरते है। शिक्षक अगर इसी तरह से असलहा लेकर विद्यालय आते रहे तो बच्चों पर उसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
वहीं बीएसए जगदीश प्रसाद शुक्ल शिक्षक अगर विद्यालय पर असलहा लेकर आते है तो गलत है। नियमानुसार उन्हें असलहा घर पर ही रखकर आना चाहिए। समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देशित किया जाएगा कि वे शिक्षकों को निर्देश दे कि जिन भी शिक्षकों के पास लाइसेंसी असलहा हैं वे विद्यालय पर लेकर न आएं। अगर शिक्षक आदेश का उल्लंघन करते है तो कार्रवाई की जाएगी।