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Sant Kabir Nagar News: गैर इरादतन हत्या के दोषी तीन सगे भाइयों समेत चार को दस साल की सजा

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संतकबीरनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम महेंद्र कुमार सिंह ने गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर तीन भाइयों समेत चार लोगों को दस- दस साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दस- दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थ दंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिमन्यु पाल ने बताया कि महुली क्षेत्र के भिटनी निवासी राम दयाल ने 31 अक्तूबर 2012 को महुली पुलिस को तहरीर दी, जिसमें कहा कि उसके पड़ोसी रामप्रीत से सहन की जमीन का विवाद चल रहा है। आरोप है कि विपक्षी अपनी जमीन में दीवार बनवा रहे हैं, तथा दरवाजा उनकी सहन में खोलना चाह रहे थे, जिसे वह रोक दिया गया।
उसी को लेकर रामप्रीत व उसके घर के लोग 30 अक्तूबर 2012 की रात 8:00 बजे गाली गलौज तथा जान माल की धमकी देने लगे। वह और उनके बेटे संत कुमार व रविंदर ने अपशब्द कहने से मना दिया। आरोप है कि रामप्रीत अपने हाथ में कुल्हाड़ी लेकर तथा योगेंद्र, महेंद्र, हरिराम आदि लाठी डंडा लेकर आ गए। रामपति ने कुल्हाड़ी से उसके बेटे रविंद्र के सिर पर वार कर दिया, जिससे उसके बेटे रविंदर का सिर फट गया और वह बेहोशी के हालत में भागकर जाकर झाड़ी में गिर गया।
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इन लोगों ने उसकी पत्नी व लड़की, लड़के संत कुमार को लाठी डंडे से मारपीट कर घायल कर दिया। बेटा संत कुमार वहां से भाग गया। मारपीट करने के बाद आरोपी वहां से चले गए। उन्होंने अपने बेटे की तलाश की तो वह रात में 12:00 बजे घायल अवस्था में नवल गुप्ता के मकान के पीछे बेहोशी के हालत में झाड़ी में गिरा मिला। उसकी हालत काफी गंभीर थी। उसको लेकर खलीलाबाद सरकारी अस्पताल गए, जहां डॉक्टर ने देखने के बाद मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया। गोरखपुर में डॉक्टर ने देखने के बाद बेटे रविंदर को मृत घोषित कर दिया।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी रामप्रीत जोगिंदर उर्फ जोगेंदर, महेंद्र, हरिराम समेत चार के विरुद्ध 31 अक्तूबर 2012 को रिपोर्ट दर्ज की। विवेचक ने विवेचना के बाद आरोपी राम प्रीत, जोगिंद्र उर्फ जोगेंद्र, महेंदर उर्फ महेंद्र, हरिराम समेत पांच के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस दौरान विचारण 10 दिसंबर को एक आरोपी किशोर को अपचारी घोषित होने पर कोर्ट ने उसकी पत्रावली अलग कर दी।
अभियोजन साक्षी की तरफ से 12 लोगो की गवाही हुई। साथ ही 15 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अभियोजन साक्ष्य के बाद आरोपियों ने अपने बयान में कहा कि वह निर्दोष हैं। किसी को मारापीटा नहीं है न ही जान से मारा है। उन्हें झूठा फंसाया गया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अभिमन्यु पाल ने कोर्ट में अभियोजन की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि गवाहों के बयान व अभिलेखीय साक्ष्य से साबित होता है कि आरोपियों ने घटना की है। पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने दोष सिद्ध पाए गए राम प्रीत, जोगिंदर उर्फ जोगेंदर, महेंदर उर्फ महेन्द्र, हरिराम को दस- दस साल की सजा सुनाई। इसके साथ में दस-दस हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर एक- एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माना की आधी रकम मृतक के परिवार को देने का आदेश दिया।
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