कल आइए, आज का कोटा खत्म
अल्ट्रासाउंड के लिए लगती है लंबी वेटिंग
35 से ज्यादा नहीं करते अल्ट्रासाउंड
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। मरीजों का आरोप है कि यहां तैनात रेडियोलॉजिस्ट अपनी मन मर्जी के मालिक हैं। यदि आते हैं तो 11 बजे तक सेंटर बंद कर चले जाते हैं। 35 मरीजों से ज्यादा अल्ट्रासांउड भी नहीं करते। जिनका अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाता, उन्हें कहा जाता है कि आज का कोटा पूरा हो गया है, अब कल आइएगा।
जिला अस्पताल में तीन माह से अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज हलकान हैं। यहां सीएमओ कार्यालय से संबंद्ध किए गए रेडियोलॉजिस्ट डॉ वीके चौधरी की संबंद्धता अगस्त में समाप्त हो गई। उनके समय में 100 से 120 मरीजों का प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड होता रहा। उनके जाने के बाद से अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
करीब एक माह तक अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद रहा। काफी हो-हल्ला के बाद जिला अस्पताल में तैनात एक रेडियोलॉजिस्ट को सीएमएस ने अल्ट्रासाउंड में तैनात किया, लेकिन वह अपनी मर्जी से आते और जाते हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए प्रतिदिन 100 से 130 मरीज आते हैं। सोमवार को अल्ट्रासाउंड के लिए आईं बसडिला निवासी शगुफ्ता और रूकमणि ने बताया कि उनके पेट में दर्द है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा है। यहां पर 11 बजे पहुंचे तो अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद हो गया। कर्मचारी ने बताया कि अब कल लाइन लगाना, तभी अल्ट्रासाउंड हो पाएगा।
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प्राइवेट सेंटर पर लगता है 700 रुपये
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड निशुल्क है। इससे मरीजों की भीड़ रहती है। प्राइवेट सेंटर पर 500 से 700 रुपये अल्ट्रासाउंड के लिए लगते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इतनी रकम देने में परेेशानी होती है। प्राइवेट सेंटरों के लोग अस्पताल परिसर में मौजूद रहते हैं। जिन मरीजों को अल्ट्रासाउंड में दिक्कत होती है उन्हें प्राइवेट अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
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कोट
एक दिन में 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड करने का नियम है। यदि चिकित्सक 11 बजे तक 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर लेते हैं तो वह चले जाते हैं। एक और रेडियोलॉजिस्ट मिल जाए तो समस्या दूर हो सकती है। किसी तरह से चिकित्सक पर दबाव बनाकर अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है।
-डॉ. ओपी चतुर्वेदी, सीएमएस