अनियोजित तरीके से बस रहा शहर, नोटिस तक सीमित है विनियमित क्षेत्र कार्यालय की कार्रवाई
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। मगहर-खलीलाबाद विनियमित क्षेत्र में धड़ल्ले से कृषि भूमि में बिना नक्शा के मकान बनवाए जा रहे हैं। अनियोजित तरीके से शहर बसता जा रहा है। विनियमित क्षेत्र कार्यालय के जिम्मेदार समय से ध्यान नहीं दे रहे हैं। सिर्फ नोटिस जारी कर चुप्पी साध ले रहे हैं। इसका खामियाजा यहां बस रहे लोगों को ही भुगतना पड़ेगा। सड़क, जलनिकासी, बिजली, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझना पड़ेगा। इस मामले में लोगों को खुद सचेत रहना चाहिए।
वर्ष 1987 में मगहर-खलीलाबाद विनियत क्षेत्र स्थापित हुआ। जिसमें मगहर टाउन एरिया, नगर पालिका खलीलाबाद के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में सरैया, गौरापार, मिश्रौलिया, पटखौली,मडया, बंजरिया, नेदुला, सरौली, मैलानी, मोहिउद्दीनपुर, बेलवनिया, डीघा, धौरहरा, कोईलभार, घनश्यामपुर, कस्बा मगहर, रसूलाबाद, काजीपुर, मोहम्ममदपुर उर्फ काथर, रसूलपुर, बयारा, भैंसहिया, मंझरिया, नेहिया खुर्द, कटबंध, अतरौलिया,कसैला, गौसपुर, गोरखल, बनियाबारी, मडना, सादिकगंज, उसका खुर्द, उस्का कला शामिल था। बाद में संशाेधित सूची में बड़गो और खटौली भी शामिल कर लिया गया। वर्ष 1997 में संतकबीरनगर नाम से जिले की घोषणा हुई और खलीलाबाद मुख्यालय बन गया। इधर, ढाई साल पहले नगर पालिका का सीमा विस्तार हुआ तो 16 ग्राम पंचायतें शहरी क्षेत्र में शामिल हो गईं।
नियमानुसार विनियमित क्षेत्र में कृषि भूमि में मकान का नक्शा पास नहीं होता है। जिले में कोई रजिस्टर्ड प्रापर्टी डीलर भी नहीं हैं, लेकिन कृषि भूमि की प्लाटिंग करके बेचा जा रहा है। भूस्वामी हों या फिर खरीदार, सब बिना नक्शा के मकान बनवा रहे हैं। स्थिति यह है कि विनियमित क्षेत्र में कोई ऐसी जगह नहीं है, जहां कृषि भूमि में घर नहीं बन रहे हों। यहां तक अस्पताल और अन्य व्यावसायिक भवन भी बनवाए गए हैं। आधा शहर ही अनियोजित तरीके से बस गया है। अभी इसका सिलसिला थमा नहीं है। इसकी वजह से इन जगहों पर घर बनवाने वाले लोगों को सड़क, नाली, खड़ंजा, बिजली, पेयजल आदि की समस्या से जूझना ही पड़ेगा।
दो तरह के होते हैं अवैध निर्माण
अवैध निर्माण में भी दो प्रकार हैं। किसी प्लॉट पर भवन का स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण कर लिया गया है। वहीं, बिना मानचित्र के भवन का निर्माण करा लिया गया है। इन दोनों मामलों में कार्रवाई करने में विनियमित क्षेत्र कार्यालय लापरवाही बरत रहा है।
विभागीय मिलीभगत से हो रहा निर्माण
शहर के कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पर काफी सालों से बिना मानचित्र स्वीकृति कराए भवन बन गए हैं। इसमें सबसे अधिक पटखौली, सरौली, मड़या, मिश्रौलिय, घोरखल, बड़गों, बनियाबारी, डीघा, कटबंध, कसैला, उस्का कला के अलावा अन्य क्षेत्र शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में निर्माण होने के पीछे विभागीय मिलीभगत भी है। जब लोग निर्माण कराते हैं तो कर्मचारी उनके पास पहुंच जाते हैं। मिलीभगत से निर्माण रुकता नहीं है। ऐसे गृहस्वामियों को नोटिस भेजा जाता है।
पूर्व एसडीएम ने पालिका क्षेत्र को आठ जोन में बांटकर शुरू कराया था सर्वे
नगर पालिका क्षेत्र में अनधिकृत ढंग से बिना नक्शा के इमारतें खड़ी करने और भवन का आवासीय कर देकर व्यावसायिक उपयोग करने वाले लोगों को चिह्नित कराने के लिए पूर्व एसडीएम सदर/पूर्व ईओ अजय कुमार तिवारी ने सर्वे का कार्य शुरू कराया था, लेकिन एसडीएम के तबादले के बाद सर्वे का काम ठप हो गया।
नियत प्राधिकारी कोर्ट में लंबित हैं 952 वाद
विनियमित क्षेत्र कार्यालय के जेई चंद्र प्रकाश चौधरी के मुताबिक, विनियमित क्षेत्र के गठन के बाद से लेकर अब तक बिना नक्शा के मकान बनवाने अथवा स्वीकृत नक्शा से अधिक निर्माण कराने के मामले में एसडीएम सदर/नियत प्राधिकारी कोर्ट में 952 वाद दाखिल हो चुके हैं। पिछले 15 दिनों के भीतर बिना नक्शा मकान बनवाने वाले दस लोगों को नोटिस जारी किया गया है। जेई ने बताया कि दस हजार रुपये से लेकर प्रति वर्ग मीटर दस रुपये अथवा जमीन के सर्किल मूल्य तक जुर्माना का प्रावधान है। इसमें कोर्ट से आदेश पारित होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अभी तक जिले में कहीं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई है।
विनियमित क्षेत्र में चाहे ग्रीन बेल्ट हो या कृषि भूमि, मकान का नक्शा पास नहीं हो सकता है। संबंधित जेई को कड़ी हिदायत दी गई है कि वे लगातार जांच करते रहें और जहां कहीं कोई बिना नक्शा गलत तरीके से निर्माण करवा रहा हो तो उसके खिलाफ नोटिस जारी करें। जो वाद उनकी कोर्ट में लंबित चल रहे हैं, उसकी वर्तमान स्थिति पत्रावली देख कर पता करेंगे और आगे वादों के निस्तारण में तेजी लाएंगे। इसमें जुर्माना के साथ ध्वतीकरण तक की कार्रवाई का प्रावधान है। -शैलेश दूबे, एसडीएम सदरनियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र मगहर, खलीलाबाद