- एप से एफआईआर की कॉपी डाउनलोड कर इस्तेमाल कर रहे जालसाज
- महुली क्षेत्र के पीड़ित को विवेचना में लाभ दिलाने का दिया झांसा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। साइबर ठग अब जालसाजी के लिए यूपीकॉप एप पर उपलब्ध एफआईआर के ब्योरे का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। ऑनलाइन उपलब्ध एफआईआर की कॉपी डाउनलोड कर केस से नाम हटाने और आरोपी के खिलाफ सख्त कर्रवाई के बहाने फोन करके लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। यूपीकॉप एप पर दर्ज ब्योरे का जालसाजों द्वारा इस्तेमाल किए जाने के मामलों ने पुलिस का भी सिरदर्द बढ़ा दिया है। ताजा मामला महुली क्षेत्र के शनिचरा बाबू गांव में सामने आया है।
साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन जितना प्रयास कर रहा है, साइबर ठग दूसरा रास्ता अख्तियार कर ले रहे हैं। अगर कोई एक रास्ते से बच रहा है तो दूसरे रास्ते से वह साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस जा रहा है। जिले में पुलिस से शिकायत और पुलिस के यूपी कॉप एप पर दर्ज एफआईआर पर ठगों की नजर है। पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के बाद उसे यूपी कॉप पर लोड करने का निर्देश शासन स्तर से है।
साइबर अपराधी इस एप में सेंधमारी करके लोगों से ठगी करने में जुट गए हैं। ताजा मामला महुली क्षेत्र के शनिचरा बाबू गांव से निकलकर आया। पुलिस के अनुसार शनिचरा बाबू गांव निवासी इंद्रजीत ने महुली थाना पर केस दर्ज कराया, जिसकी विवेचना पुलिस कर रही है। इसी बीच साइबर अपराधी ने इंद्रजीत को पुलिस विवेचना के दौरान कार्रवाई व लाभ देने के लिए फोन करके रुपये की डिमांड की। इंद्रजीत ने मामले में तत्काल पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद अधिकारी सतर्क रहने के लिए कहकर मामले में साइबर थाना को जांच के लिए सुपुर्द किए। पुलिस की ओर से लोगों को साइबर अपराधियों से बचने के लिए पुलिस हेडक्वार्टर को भी रिपोर्ट भेजी गई। जानकारों की माने तो यूपी कॉप की वेबसाइट में इससे बचने की व्यवस्था की जा रहा है।
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साइबर अपराधी तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर लोगों को झांसे में लेकर ठगी कर रहे हैं। रुपये के लेनदेन के संबंध में कोई भी फोन काॅल आने पर पहले उसकी सत्यता के बारे में पता कर लें। अगर पुलिस से जुड़ा मामला है तो स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी जरूर दें।
- सुशील कुमार सिंह, एएसपी