विकास खंड हैंसर के पशु आश्रय केंद्र कटेया में ठंड से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
धनघटा। दिन में गर्मी और रात में पड़ रही ठंड मनुष्य और पशुओं के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रही है। लोग तो गर्म कपड़ों से ठंड से बचाव कर ले रहे हैं, लेकिन पशुओं के लिए पशु आश्रय केंद्रों में कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पशु बीमार पड़ने लगे हैं।
किसानों की फसल को छुटटा पशुओं से बचाने के लिए क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों में पशु आश्रम केंद्र संचालित हैं। पशु आश्रय केंद्रों पर रखें गए पशुओं का देखभाल जैसे-तैसे की जा रही है। अब जब ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है तो पशु आश्रय केंद्रों पर छुट्टा पशुओं को ठंड से बचाने के लिए टाट पट्टी का इंतजाम होना चाहिए, लेकिन क्षेत्र के रजनौली, कोचरी, कटेया, मझौरा आदि पशु केंद्र पर रखें गए पशुओं के ठंड से बचाने के लिए अभी तक कोई इंतजाम नहीं है। ग्रामीण राम प्रकाश, शिवपूजन, राम शंकर, रामचरित्र, अनिल कुमार आदि का कहना है कि फसल को बचाने के लिए भले ही पशु आश्रय केंद्रों के निर्माण पर भारी भरकम रकम खर्च की गई, लेकिन अब भी छुटटा पशु किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं, जबकि आश्रय केंद्रों पर ठंड के साथ पशु भूख और प्यास से तड़प रहे हैं। ठंड से बचाव का उपाय यदि पशु आश्रय केंद्रों में जल्द नहीं किया गया तो पशुओं की सेहत बिगड़ सकती है। रजनौली में तालाब के किनारे पर पशु आश्रय केंद्र का निर्माण किया गया है। जहां रात में हल्की हवा पशुओं को परेशानी हो रही है। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी आरपी पांडेय का कहना है कि पशु आश्रय केंद्रों पर पशुओं को ठंड से बचाव के लिए रात में चारों तरफ से घेरने के लिए टाट पट्टी का इंतजाम करने का निर्देश ग्राम पंचायत अधिकारियों को दिया गया है। कई जगहों पर रात में टाट पट्टी लगाए भी जा रहे हैं।