अयोध्या के लिए निकले कारसेवकों को पुलिस ने मेहदावल से कर लिया था गिरफ्तार
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मेंहदावल। राम मंदिर के लिए जेल जानेवालों में मेंहदावल के भी कई कारसेवक थे। उस दौरान उन्हें काफी प्रताड़ित भी किया गया था। आज राम मंदिर को बनता देख वे काफी उत्साहित हैं। जेल जाने की पीड़ा पर मंदिर की खुशी भारी है। इसलिए इन कारसेवनों ने 22 जनवरी को दिवाली मनाने का फैसला किया है।
ऐसे में मेंहदावल क्षेत्र के कार सेवक अयोध्या में कार सेवा के लिए घर से निकले और मेंहदावल पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। जेल में यातना सहने के बाद भी उनके हौसले नहीं टूटे।
मेंहदावल क्षेत्र के छपिया अंगद गांव निवासी कृष्णानंद त्रिपाठी बताते हैं कि 24 अक्तूबर 1990 की भोर में साथियों के साथ अयोध्या के लिए साइकिल से निकले थे। लेकिन रास्ते में ही मेंहदावल पुलिस सभी को हिरासत में लेकर मेंहदावल थाने लाई। यहां से हमें गाड़ियों में ठूंस कर बस्ती पहुंचाया गया। वहां बनाई गई अस्थायी जेल में रखा गया। यहां हमारी तरह कई अन्य राम भक्त भी अलग-अलग जिलों के बंद थे। 24 घंटे पुलिस अभिरक्षा में रहने के दौरान उन पर जुल्म भी हुआ, भोजन तक नहीं मिल पाता था। लेकिन कार सेवकों ने हिम्मत नहीं हारी। इस अस्थायी जेल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शाखा लगाई जाती थी। सभी कार सेवक उसमें सम्मिलित होकर जय श्री राम का उद्घोष करते थे। पुलिस प्रशासन रोकने का प्रयास भी करती थी। झड़प भी होती थी। लेकिन, राम भक्तों के इरादे नहीं बदले।
इसी गांव के निवासी सिंधु नाथ त्रिपाठी ने बताया कि कार सेवा में अपने साथ ईंट लेकर हम लोगों के जाने की तैयारी थी। कार सेवकों के साथ साइकिल से हम लोग निकले कि मेंहदावल नगर से बाहर पुलिस ने हम सभी को हिरासत में ले लिया और थाने लाई। कुछ पुलिस कर्मियों ने दुर्व्यवहार भी किया, लेकिन लक्ष्य राम मंदिर निर्माण का था। बाद में पुलिस ने कार सेवकों को बस्ती में बनाई गई जेल में पहुंचा दिया। 11 नवंबर 1990 को हम लोगों की रिहाई हुई। रिहाई के दौरान राम भक्त धरने पर बैठ गए और यह मांग करने लगे कि जहां से राम भक्तों को हिरासत में लिया गया है, वहां तक पहुंचाने की व्यवस्था प्रशासन करे। राम भक्तों की मांग के आगे जिला प्रशासन को झुकना पड़ा और राम भक्तों को उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था कराई गई। तब जाकर राम भक्त शांत हुए। आज राम मंदिर निर्माण का सपना पूरा हो रहा है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। यह नए युग की शुरुआत के साथ ही राम राज्य के सपने को साकार करने जैसा है। संवाद