नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
संतकबीरनगर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने रेलवे में टीसी व ब्लॉक कोर्डिनेटर पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर साढे़ तीन लाख रुपये की ठगी करने और फर्जी नियुक्ति पत्र देने के आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के सहसराव माफी के मकसूद अली ने तहरीर में कहा है कि उसकी मुलाकात अकबर अली निवासी भैसहिया से हुई। उसके लड़के इम्तियाज को नौकरी लगवाने को अकबर अली ने कहा और कहा कि उसका बहुत से विभाग में जुगाड़ है। इम्तियाज को खलीलाबाद ब्लॉक में कोर्डिनेटर के पद पर नौकरी लगवा देगा। पीड़ित ने झांसे में आकर अकबर की पत्नी रुबीना, पिता मोहमाद असलम के कहने पर दो लाख पचास हजार रुपये अकबर को दे दिया। उसने बेटे इम्तियाज के नाम नौ सितंबर 2018 को ब्लॉक कोर्डिनेटर पद का नियुक्ति पत्र दिया। ब्लॉक पर गया तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। जब इसकी शिकायत की तो आरोपियों ने कहा कि पैसा जमा है, डूब जाएगा। विश्वास करिए रेलवे में टीसी पद पर नियुक्त निकली है, एक लाख रुपये और लगेगा। पीडित ने उपरोक्त की बात पर विश्वास करके एक लाख रुपये अपनी पत्नी के खाता नंबर से अकबर की पत्नी रुबीना के खाते में ट्रांसफर कर दिया। उपरोक्त अकबर अली ने दस मई 2019 को रेलवे का नियुक्ति पत्र दिया, जो फर्जी था। पीड़ित ने जब तीन लाख पचास हजार रुपया मांगे तो अकबर अली ने कहा कि जिस तरह से तमाम पुलिस वालों को व्यक्तियों को फर्जी मुकदमे में फंसाया है, उसे भी फंसाकर बर्बाद कर देगा। पुलिस ने इस मामले में आरोपी अकबर अली, रुबीना और मोहम्मद असलम के खिलाफ जालसाजी और गबन का केस दर्ज किया। न्यायालय में आरोपी मोहम्मद असलम ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि भोले भाले लोगों से नौकरी के नाम पर पैसा वसूली की जाती है। सुनवाई के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ला ने आरोपी मोहम्मद असलम की अग्रिम जमानत प्रार्थना निरस्त कर दिया।