संतकबीरनगर। एआरटीओ के घूस मांगने का वीडियो वायरल होने के मामले में नया मोड़ सामने आया है। बस मालिक किशन यादव का आरोप है कि वीडियो वायरल होने के बाद प्रतिशोध में आकर एआरटीओ ने उसकी बस को काली सूची में डाल दिया।
दरअसल 28 अप्रैल को सोशल मीडिया पर बस संचालक किशन यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करके आरोप लगाया था कि एआरटीओ ने उसकी बस का पांच किलोमीटर तक पीछा किया। फिर बस रोककर चालान की धमकी देने लगे। चालान न करने के एवज में रुपये की मांग की। जब बस संचालक ने रुपये मांगने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया तो एआरटीओ ने प्रतिशोध में आकर बस को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया।
वहीं, ऑनलाइन उपलब्ध दस्तावेज में बस पर पूर्व में हुए चालान को कारण बताते हुए उसे ब्लैक लिस्ट में डाला गया है। वहीं, अप्रैल से पहले बस पर केवल दो चालान था। बस को ब्लैक लिस्ट करते समय जिस चालान नंबर का जिक्र किया गया है, वह अब तक बस पर दर्ज ही नहीं है। ऐसे में मामले में प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। एम परिवहन एप पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, नौ अप्रैल से लेकर 24 अप्रैल के बीच बस का कुल तीन चालान काटा गया है। इसके पहले बस पर फरवरी और दिसंबर में केवल दो चालान दर्ज थे।
चार दिन बाद भी नहीं बढ़ी प्रकरण की जांच
एआरटीओ के घूस मांगने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अमर उजाला में 30 अप्रैल के अंक में प्रकाशित खबर का का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी संदीप कुमार ने अपर जिलाधिकारी न्यायिक को प्रकरण की जांच सौंपी थी। हालांकि चार दिन बीत जाने के बाद भी अब तक जांच में कुछ प्रगति देखने को नहीं मिली है।
काली सूची में शामिल वाहन चल नहीं सकते
आरटीओ अथवा एआरटीओ के जरिए ब्लैक लिस्ट में वाहन को शामिल करने के बाद उसका फिटनेस और ट्रांसफर से संबंधित कार्य नहीं हो पाता। ऐसे वाहन नियमानुसार सड़क पर चल नहीं सकते। ऐसे वाहन को काली सूची से बाहर करने के बाद भी ये काम हो सकते हैं।
एडीएम न्यायिक को प्रकरण की जांच सौंपी गई है। अधिकारी को जांच करके दस दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद जैसी स्थिति मिलेगी, वैसी कार्रवाई होगी।
- संदीप कुमार, डीएम