कमरे में बंद किताबें, बच्चे खाली हाथ
जूनियर हाईस्कूल, डायट और अतिरिक्त कक्षा कक्ष में रखीं हैं किताबें
छमाही परीक्षा सिर पर, बिना कैसे बच्चे कैसे देंगे परीक्षा
संतकबीरनगर। परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों में वितरित करने के लिए आई किताबे जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद, डायट और अतिरिक्त कक्षा कक्ष में बंद कर रखी गई है। इन पुस्तकों को वितरित न कर कमरों में रख कर खराब कराया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर आंखे बंद किए हुए है, जबकि छमाही परीक्षा सिर पर है। ऐसे में बच्चे बिना किताब के परीक्षा कैसे देंगे यह समझ से परे है। इसको लेकर शिक्षक भी परेशान है।
जिले के 1247 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 250 कंपोजिट विद्यालय, 805 प्राथमिक विद्यालय और 192 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब एक लाख 53 हजार विद्यार्थी नामांकित हैं। विद्यार्थियों के लिए कुल 10 लाख के करीब किताबें आ चुकी हैं। इन किताबों का वितरण विभाग को खुद विद्यालय तक करना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया होनी थी, पर विभाग ने टेंडर प्रक्रिया कब पूरी की इसकी जानकारी शिक्षको को नहीं है। वाहनों के जरिए इन किताबों को स्कूलों तक पहुंचाना था, अभी तक मात्र 50 हजार बच्चों तक ही किताबें पहुंच पाई है। जबकि एक लाख के करीब बच्चे बिना किताब के पढ़ रहे है।
तीन दिन पहले राज्य शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने बीएसए कार्यालय पर धरना देकर स्कूलों तक किताबे पहुंचाने की मांग की थी। इसके साथ कहा था कि बच्चों को किताबें नहीं मिली है, बच्चे बिना किताब के स्कूल में पढ़ाई करने आ रहे है। राज्य शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष नवीन त्रिपाठी ने कहाकि पुस्तकें नहीं मिली है और छमाही परीक्षा भी आ गई है। बच्चे कैसे परीक्षा देेंगे यह समझ में नहीं आ रहा है। यह विभाग की लापरवाही है। अगर जल्द से जल्द किताबे बच्चों को नहीं मिली तो फिर धरना शुरू किया जाएगा।
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कोट
किताबों को विद्यालयों पर पहुंचाया जा रहा है। 50 प्रतिशत से अधिक किताबें विद्यालयों पर जा चुकी हैं। जल्द ही सभी किताबें विद्यालयों पर पहुंच जाएंगी।
-अतुल कुमार तिवारी, बीएसए