संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। अगर आपको मिठाई पसंद है तो सावधान हो जाइए। बाजार की मिठाई आपकी सेहत की दुश्मन बन सकती है। मिठाई बनाने में गाय और भैंस के दूध से बने खोवा या छेना की जरूरत नहीं बल्कि, बाजार में बिक रहे केमिकल पाउडर का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा सस्ता वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल हो रहा है। शहर में कई जगहों पर ऐसी मिठाइयां धड़ल्ले से बिक रही हैं। ये नवाबगंज गोंडा और आजगमढ़ से आ रहे मिलावटी खोआ से भी मिठाई बनाई जा रही हैं।
बाजार से मिठाई खरीद रहे हैं तो सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई खपाई जा रीह है, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में मिलावट खोर भी सक्रिय हो गए हैं, जो मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा, पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।
जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा भी समय-समय पर इसके विरुद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मिलावटखोरी का यह धंधा जोरों से चल रहा है। कहीं न कहीं विभाग की अनदेखी भी मिलावटखोरों को सक्रिय करती है।
खराब मिठाई को फिर से बना देते है चाकलेट बर्फी : जो मिठाई एक सप्ताह से अधिक हो जाता है और वह खराब हो जाता है, लेकिन दुकानदार इसे फेंकते नहीं है बल्कि कारीगर उसे फिर भूनकर चाकलेट बर्फी बनाते हैं। इनमें वह चीनी का प्रयोग करते है। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होता है।
18 से 20 हजार में बिहार से आते हैं कारीगर : जिले में मिठाई की दुकानों पर त्योहार के समय बिहार से कारीगर आते है और मिठाई बनाते है। यह कारीगर एक माह का 18 से 20 हजार रुपये लेते हैं। साथ ही लेबर को नौ से 10 हजार रुपये मिलते हैं, जो पूरी तरह से मिठाई बनाने में पारंगत होते हैं।