संतकबीरनगर। भागदौड़ भरी जिंदगी में अव्यवस्थित जीवन शैली, खानपान, सोने, उठने, बैठने के गलत तरीकों के कारण गर्दन दर्द (सर्वाइकल स्पेंडलाइटिस) के लोग शिकार हो रहे हैं। युवाओं में यह रोग तेजी से बढ़ रहा है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक हड्डी रोग की ओपीडी में आने वाले 50 फीसदी मरीज सर्वाइकल के आ रहे हैं। इसमें ज्यादातर युवा वर्ग के लोग शामिल हैं।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। मेडिसिन विभाग के बाद हड्डी रोग के चिकित्सकों के पास मरीजों की भीड़ देखने को मिल रही है। अस्पताल में रोज औसतन ओपीडी 1200 मरीजों की है। इसमें 400 के आस-पास मरीज हड्डी रोग विभाग में परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से सर्वाइकल पीड़ित 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव ओम भू के मुताबिक सर्वाइकल मांसपेसियों पर अधिक भार के कारण होता है। पहले 50 से अधिक उम्र के लोगों में सर्वाइकल की समस्या देखने को मिलती थी, लेकिन अब इस समस्या से पीड़ित युवाओं की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
- सर्वाइकल के लक्षण और बचाव
सर्वाइकल के लक्षण में मुख्य रूप से सिर में दर्द, गर्दन और कंधों में जकड़न, हाथ पैर में कमजोरी, बाजुओं में कमजोरी और गर्दन के दोनों तरफ दर्द शामिल है। सर्वाइकल से बचाव के लिए जरूरी है योग, प्राणायाम, और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करें। बहुत देर तक एक ही अवस्था में बैठकर और खड़े होकर काम करने से बचें। पतला तकिया का इस्तेमाल करें और अधिक दर्द होने पर चिकित्सक से परामर्श लें।
अनियमित दिनचर्या, खानपान, कार्यालय में बहुत देर तक एक ही अवस्था में काम करना, ऊंचा तकिया लगाकर सोना, गलत तरीके से उठना, देर रात तक मोबाइल चलाना आदि कारणों से गर्दन दर्द की समस्या लोगों में हो रही है। हड्डी विभाग की ओपीडी में आधे से अधिक मरीज गर्दन दर्द और मांसपेसिंयों में खिंचाव की समस्या को लेकर आ रहे हैं। इनमें युवाओं की संख्या अधिक है। गर्दन दर्द से बचाव के लिए जरूरी है, दिनचर्या को नियमित रखें। योग आसन और व्यायाम करें। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार लें।
डॉ. अमित कुमार सिंह
हड्डी रोग विशेषज्ञ