संतकबीरनगर। डायरिया, निमोनिया, हाईग्रेड फीवर से पीड़ित बच्चों से जिला अस्पताल का 10 बेड का आईसीयू लगातार फुल चल रहा है। अब बच्चों में झटके की समस्या ने नई चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक ओपीडी में आने वाले तेज बुखार से पीड़ित बच्चों में आधा दर्जन के आसपास झटका की शिकायत को लेकर आ रहे हैं। गंभीर बच्चों को भर्ती किया जा रहा है। चिकित्सक के मुताबिक बच्चों को झटका आए तो सतर्क हो जाना चाहिए कभी-कभी जानलेवा भी हो जाता है। तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
डायरिया, निमोनिया और तेज बुखार का सीजन चल रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में अधिकांश बच्चे इन्हीं रोगों से पीड़ित आ रहे हैं। रोज की तरह ही सोमवार को भी बच्चों से पीआईसीयू फुल रहा जबकि पीआईसीयू वार्ड में 15 बच्चे भर्ती मिले। अस्पताल में रोज हाईग्रेड फीवर के साथ पांच से सात बच्चे झटका से पीड़ित आ रहे हैं। जिले इस वर्ष 14 मरीज एईएस के मिल चुके हैं। पीआईसीयू में भर्ती झटका पीड़ित तीन साल के अभय कुमार का स्वास्थ्य पांच दिन बाद भी सामान्य नहीं हुआ है।
बाल रोग विशेषज्ञ के मुताबिक तेज बुखार के कारण कीड़ा दिमाग में पहुंचकर गांठ बना लेता है। इसके अलावा बच्चों में कैल्शियम और मैग्नीशियम का संतुलन बिगड़ने के कारण भी बुखार के साथ झटका आता है। बरसात के सीजन से शुरू होकर सर्दी आने तक इसका प्रकोप रहता है। लेकिन इन दिनों में भी रोज झटका से पीड़ित बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। झटका के पीड़ित बच्चों में हाथ एकदम से जकड़कर रखना, मरीज के अंगों में झनझनाहट अनुभव होना, मुंह में झाग निकलना आदि शामिल है।
बचाव के उपाय
बच्चों को धूप से बचाएं।
खुले में बिक रहा सामान खाने को न दें।
गंदगी वाले स्थानों पर बच्चों को न ले जाएं।
ताजा भोजन खाने को दें।
सोने पर मच्छरदानी का उपयोग करें।
बुखार आए तो चिकित्सक को दिखाएं।
तेज बुखार के साथ झटका से पीड़ित बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं। गर्मी और तेज धूप के कारण बच्चों को हाईग्रेड फीवर हो रहा है। बुखार बहुत तेज होने पर भी झटका आता है। झटका आने के कई अन्य कारण भी हैं। बच्चों को झटका आए तो सतर्क हो जाना चाहिए। तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
- डॉ. आरपी पाल, बाल रोग विशेषज्ञ