धनघटा/ संतकबीरनगर। घाघरा नदी की बाढ़ को रोकने के लिए बनाया गया एमबीडी बांध मरम्मत की राह देख रहा है। बांध पर जगह-जगह हुए रेनकट और रैट होल समय से पहले भरे नहीं गए तो घाघरा नदी की तबाही को रोकना मुश्किल होगा।
मानसून आने में एक महीने से कम का समय शेष है, लेकिन घाघरा नदी की बाढ़ से निपटने की तैयारी शुरू नहीं हुई, जबकि घाघरा नदी बरसात के मौसम में लगातार कई वर्षों से एमबीडी बांध के दक्षिण में बसे गांव में तबाही मचाने के साथ एमबीडी बांध पर दबाव बनाती चली आ रही है। पिछले वर्ष तुरकौलिया नायक गांव के पास नदी की कटान से बांध को जबरदस्त खतरा उत्पन्न हो गया था। बांध को बचाने के लिए सिंचाई विभाग को लगभग एक महीने तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
इन सबके बावजूद इस वर्ष सिंचाई विभाग बांध की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिख रहा है। छपरा मगरबी गांव के करीब पोकलैंड और जेसीबी मशीन से नदी के किनारे किए जा रहे बालू खनन से नदी की धारा उत्तर की तरफ बढ़ती चली आ रही है। गांव वालों का कहना है कि पिछले वर्ष घाघरा नदी की बाढ़ ने छपरा मगरबी के पास बने रिंग बांध को तोड़कर नदी का पानी कुर्मियान टोला को अपने चपेट में ले लिया था। उसके बाद छपरा मगरबी के पास ही एमबीडी बांध में रिसाव शुरू हो गया था।
एमबीडी बांध पर इस समय जगह जगह होल और रेनकट होने से बांध कमजोर हो गया है। ग्रामीण उदयभान, अशोक कुमार, मोतीलाल, रामनरेश, राम नयन, अरविंद आदि का कहना है कि बालू खनन के कारण घाघरा नदी की धारा उत्तर दिशा की तरफ मुड़ चुकीं हैं। इस वर्ष नदी एमबीडी बांध पर जबरदस्त दबाव बना सकती है। बांध के मरम्मत का काम अभी तक नहीं किया गया, जिसके कारण बांध जगह जगह कमजोर है। नदी यदि दबाव बनाई तो उसके बेग को रोकना मुश्किल होगा।
बांध हर जगह पूरी तरह से मजबूत है। अगर कहीं रेन कट या रैट होल है तो उसे जल्द ही भर दिया जाएगा।
-सतीष चंद, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग