फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sant Kabir Nagar News: पर्यटन के क्षितिज पर चमकेगी बखिरा झील, तैयार हो रही कार्य योजना

विज्ञापन
विज्ञापन
शासन ने यहां राज्य पक्षी सारस संरक्ष्ण केंद्र बनाए जाने पर सहमति जताई, 200 करोड़ से होंगे विकास के कार्य
विज्ञापन




29 वर्ग किलोमीटर फैली है झील, ठंड के मौसम में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हुआ
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। लंबे समय से ऐतिहासिक बखिरा झील को विकसित करने की उठ रही मांग अब पूरी होने के आसार दिखाई देने लगे हैं। शासन ने यहां राज्य पक्षी सारस संरक्ष्ण केंद्र बनाए जाने पर सहमति जताई है। वहीं प्रशासन बखिरा झील को पर्यटन के क्षितिज पर चमकाने की कार्य योजना तैयार करा रहा है। करीब 200 करोड़ रुपये खर्च कर यहां विकास के विभिन्न कार्य कराएं जाने की तैयारी है।
जनपद मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर उत्तर खलीलाबाद-मेंहदावल मार्ग पर स्थित बखिरा कस्बा है। वहीं से तीन किलोमीटर पूर्वी भाग में 29 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में बखिरा झील फैली हुई है। झील को मोती झील के नाम से भी जाना जाता है। इसके किनारे बसे गांवों के मछुवारा समुदायक की आजीविका ही इसी झील पर आश्रित है। नवंबर से फरवरी तक चार माह विशाल जलाशय प्रवासी पक्षियों के लिए पनाहगाह बन जाती है। इसी को देखते हुए वर्ष 1990 में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए इसे पक्षी विहार का दर्जा दिया, लेकिन तीन दशक बाद भी झील का विकास अभी तक तक नहीं हो पाया। इस विस्तृत भू-भाग में विचरते पक्षियों को देखने के लिए सैलानी यहां आ सकें, इसके लिए बखिरा से तीन किलोमीटर बखिरा-सहजनवां मार्ग पर जसवल भरवलिया के उत्तर ओर डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क बनी है। परिसर में वाच टॉवर के अलावा वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आवास भी बना है। डीएफओ पी के पांडेय बताते है कि यहां पर पूरे वर्ष पानी भरा रहता है। झील में जलीय वनस्पतियां छोटे-छोटे कीड़े ,घोंघे व सीप आदि प्रचुरता में है। नवंबर से यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। अधिक ठंडक पड़ने पर लालसर पक्षी की आवक होती है। संवाद
विज्ञापन

इंसेट
प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा स्थल है झील

प्रवासी पक्षियों के लिए ठंड का महीना मुफीद होता है। खासकर बखिरा झील प्रवासी पक्षियों का पनाहगार बनती है। जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, प्रवासी पक्षियों के कलरव से झील गुलजार होती है। दूर दराज से लोग यहां आते हैं। अक्तूबर की शुरुआत होते ही यूरोप, साइबेरिया, तिब्बत, चीन से पक्षियाें का आना शुरू हो जाता है। बखिरा पक्षी विहार में दिवाली से लेकर होली तक प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की कलरवयुक्त ध्वनि पर्यटकों को खूब लुभाती है। सर्दी का मौसम बीतने के बाद प्रवासी पक्षी लौट जाते हैं। वन विभाग की माने तो यहां 113 प्रजाति के प्रवासी पक्षी आते हैं। खास बात यह है कि इन प्रवासी पक्षियों में अधिकांश शाकाहारी है। यहां पाए जाने वाले विदेशी पक्षियों में लालसर, हिवीसिल, पोचार्ड, सूरखाब, गोजू, सवल, पिंटेल और मूरहेन आदि हैं। जबकि स्थानीय पक्षी में कैमा, वाटरहेन, राईटर, कारमोंटेंट और विभिन्न प्रकार के बगूले व सारस आदि हैं।

इंसेट
प्रस्तावित कार्य योजना
- बखिरा झील के चारों तरफ करीब 30 किलाेमीटर तक बांध बनाया जाएगा।
- झील से करीब एक किलोमीटर दूर 15 एकड़ जमीन में दूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा।
- करीब 100 हेक्टेयर जमीन में आर्गेनिंग फार्मिग की जाएगी।
- फ्लोटिंग सोलर पार्क बनाया जाएगा।
- वाटर पार्क बनाया जाएगा।
- इको विलेज बनाया जाएगा।
-मोटराइज्ड बोट की सुविधा दी जाएगी।
- झील की सफाई कराई जाएगी।
इंसेट
बखिरा झील उपेक्षित पड़ी है। यहां के विकास को लेकर पहले भी कवायदे हुई,लेकिन कोई काम नहीं हो पाया। यहां ठंड के मौसम में रौनक रहता है। प्रवासी पक्षियां काफी संख्या में यहां आती है। यदि झील का विकास हो जाए तो यहां पर्यटक आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढे़गे।
हाजी इमामुद्दीन, बखिरा
इंसेट
बखिरा झील जिले की पहचान है। इसे मोती झील के नाम से भी जाना जाता है। यह झील गोरखपुर और संतकबीरनगर दो जिलों में फैली है। हर समय झील में पानी रहता है। यदि झील को विकसित कर दिया जाए तो यह पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा। इससे यहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
- अंजनी केसरा, बखिरा
इंसेट

बखिरा झील के विकास को लेकर शासन- प्रशासन बेहद गंभीर है। झील रामसर साइट पर भी है। डीएम विशेष रूचि लेकर झील को विकसित करने की कार्य योजना तैयार करा रहे है। यहां पर्यटन विकास के विभिन्न कार्य कराए जाने की योजना है। नई रेल लाइन जो खलीलाबाद से बहराइच तक बनाई जानी है,उसमें बखिरा में रेलवे स्टेशन बनाए जाने की मांग किए है। जिससे दूर-दराज लोगों को रेलवे की सुविधा भी झील तक पहुंचने में उपलब्ध है। राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक में यहां राज्य पक्षी सारस संरक्षण केंद्र बनाए जाने की सहमति बनी है। इस पर 36 64 करोड़ की योजना रखी गई है। झील विकसित होने से निश्चित ही रोजगार के बड़े अवसर उपलब्ध होंगे।
राकेश सिंह बघेल, पूर्व विधायक मेंहदावल

इंसेट
बखिरा झील का विकास प्राथमिकता में शामिल है। इसकी कार्य योजना तैयार कराई जा रही है। करीब 200 करोड से यहां विकास के कार्य कराए जाएंगें। पीडब्ल्यूडी, मनरेगा, सीएसआर फंड, ग्राम्य विकास विभाग, पर्यटन विभाग इसमें अपनी-अपनी सहभागिता देंगे। झील में जो किसानों की जमीन है,उस पर भी सहमति बनाई जाएगी। पर्यटन विकास के साथ-साथ रोजगार के बड़े अवसर की संभावनाओं के मद्देनजर वे हर काम कराएं जाएंगे, जो जरूरी होंगे। यहां से बिजली का उत्पादन भी हो सकें, इस पर मंथन चल रहा है। शासन स्तर से भी झील के विकास का आश्वासन मिला है।
विज्ञापन

- महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
















पूर्व में हुई कवायद की चर्चा की और झील के विकास के लिए अपने सुझाव दिए। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि झील के विकास के लिए जन आंदोलन बनाए जाने की जरूरत है। इसमें आम लोगों तक झील के विकास होने से फायदे बताए जाने की आवश्यकता है। इसमें सभी विभाग को अपनी-अपनी कार्य योजना पर काम करने की जरूरत है। जिले के विकास के लिए उपलब्ध बजट का 50 प्रतिशत भी यदि झील के विकास पर खर्च किया जाए तो यह धरातल पर दिखने लगेगा। यहां आर्गेनिंग फार्मिग, रेन हार्वेस्टिंग, इको टूरिज्म, वाटर पार्क, सोलर पार्क आदि विकसित किया जाए। यहां ऐसे उद्योग को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत हे,जिसके जरिए रोजगार का हब बनाया जा सकें। झील के विकास को लेकर गंभीर रहने की जरूरत है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें