संतकबीरनगर। धनघटा में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल अव्यवस्था का शिकार है, जबकि यहां रोजाना 50 से अधिक मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन अस्पताल परिसर में न ही पीने के लिए पानी की व्यवस्था और न ही शौचालय का इंतजाम। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पहले गौवापार पौली में किराए के मकान में चल रहा था। 10 वर्ष पहले इस अस्पताल के लिए धनघटा में भवन का निर्माण हुआ। तभी से धनघटा में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। भवन निर्माण के दौरान बिल्डिंग तो जिम्मेदारों ने खड़ा कर दिया, लेकिन खिड़की और अंदर का फाटक लगाना भूल गए। तभी से निर्माण कार्य आधा अधूरा पड़ा हुआ है।
बाउंड्री का भी निर्माण नहीं हुआ। अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी समेत चार लोग कार्यरत हैं। मंगलवार को राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल धनघटा में दवा के लिए पहुंचीं मरीज संतोष, रामकेवल, राजाराम, रामनरेश आदि ने कहा कि आयुर्वेदिक दवा से रोग जड़ से समाप्त होता है। इस कारण यहां से इलाज करा रहे हैं और उसका लाभ भी मिल रहा है, लेकिन अस्पताल परिसर में न तो हैंडपंप लगाया गया है और न ही शौचालय है। अस्पताल के अंदर बनाया गया शौचालय कबाड़ से भरा पड़ा है।
इस संबंध में अस्पताल की चिकित्सक डॉ. ज्योति कौशल ने कहा कि अस्पताल में अधूरा पड़े कार्य को पूरा करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। सुबह आठ बजे से दो बजे तक मरीजों का इलाज किया जाता है। ज्यादा महंगी दवाई तो अस्पताल में नहीं है, लेकिन जो दवाएं हैं उसे मरीजों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। यहां गठिया, बवासीर, साटिका, पेट में दर्द, बदहजमी, उल्टी, दस्त रोग से पीड़ित ज्यादातर मरीज आते हैं।