- पेयजल योजना की धीमी रफ्तार से शुद्ध पानी की उम्मीद टूटी
- करीब छह माह से हो रहा है कार्य, पुरानी पाइपलाइनों को छुआ तक नहीं गया
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 100 करोड़ से पेयजल योजना शुरू की गई है। करीब छह माह से कार्य हो रहा है, लेकिन कार्य की गति काफी धीमी है। कहीं पानी की टंकी के लिए अभी बुनियाद ही पड़ी है तो कहीं पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू हुई हो सका है। पुरानी पाइप लाइनों को छुआ तक नहीं गया है। ऐसे में लोगों को स्वच्छ पानी मिलने की उम्मीद टूट रही है ।
नगर पालिका परिषद खलीलाबाद क्षेत्र की आबादी करीब एक लाख है। इसमें सीमा विस्तारित क्षेत्र भी शामिल है। अभी तक पेयजल की जो व्यवस्था है, उसके मुताबिक शहर में मात्र एक ओवरहेड टैंक है। साथ ही चार नलकूप हैं, जिसमें से एक बंद हा़े चुका है। शहर के 13 वार्डों में आधी-अधूरी व्यवस्था के तहत जैसे-तैसे पानी का आपूर्ति की जा रही है, जबकि 12 मोहल्ले ऐसे हैं, जहां जलापूर्ति की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है।
सीमा विस्तारित व नई बस्तियों में जलापूर्ति के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं हो सका है। इसके अलावा जहां जलापूर्ति हो रही है, वहां की पाइपलाइन भी जर्जर हो चुकी है, जिसके कारण लोगों के घरों में प्रदूषित पानी पहुंचता है। इस समस्या को दूर करने के लिए जल निगम शहरी व नगर पालिका परिषद ने करीब 100 करोड़ की पेयजल परियोजना तैयार की, जिसकी मंजूरी मिलने के बाद कार्य शुरू कराया गया है।
गोरखल में पानी का टंकी का निर्माण चल रहा है, लेकिन इसकी गति काफी धीमी है। अभी भी टंकी अधूरी पड़ी हुई हैं। पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी धीमी गति से हो रहा है। जिससे लोगों की उम्मीदें टूटने लगी है।
बदली जानी है पुरानी पाइपलाइन
शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए जो पाइप लाइन है वह काफी जर्जर हो गई है। इसके कारण अक्सर दूषित पानी आता रहता है। यह पीने योग्य नहीं रहता है। ऐसे में पुरानी पाइपलाइन को बदल कर नई पाइपलाइन बिछाई जानी है, लेकिन अब तक यहां कोई काम नहीं हो सका है। शहर निवासी राम तेज, उमेश कुमार आदि ने कहा कि पेयजल आपूर्ति के लिए योजना शुरू होने पर काफी उम्मीद लगी थी, लेकिन कार्य की गति काफी धीमी रहने से उम्मीद टूटने लगी हैं।
शहर में पेयजल योजना पर काम चल रहा है। बीच में बारिश के कारण थोड़ा व्यवधान आया था, लेकिन अब काम की गति तेज हो गई है। जल्द ही कार्य पूरा करा लिया जाएगा।
- सभाजीत यादव,
अवर अभियंता, जल निगम शहरी