पति की मौत के बाद अपनों ने किया किनारा
सीएम बाल सेवा योजना की उम्मीदें भी नहीं बनी सहारा
चार बेटियों की परवरिश का जिम्मा अकेली मां के कंधे पर
अप्रैल से नहीं मिली रकम तो बेटियों की नहीं भर पाई फीस
ऑनलाइन पढ़ाई करने को विवश हैं बेटियां
संतकबीरनगर। कोविड से पति की हुई मौत से अचानक चार बेटियों का जिम्मा मां के कंधे पर पड़ा तो पीड़ा असहनीय हो गई। पति की मौत के बाद ससुरालियों ने भी किनारा कर लिया। सीएम बाल सेवा योजना की उम्मीदें भी सहारा नहीं बन पाई। तब बेटियों के स्कूल की पढ़ाई भी प्रभावित हो गई। अब बेटियां घर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
खलीलाबाद शहर में किराए का मकान लेकर अपनी चार बेटियों की परवरिश कर रही मां ने अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा कि पिछले साल कोरोना से पति की मौत हो गई। पति की बीमारी के दौरान ही ससुरालियों ने किनारा करना शुरू कर दिया था। सीएम बाल सेवा योजना से पैसा मिलना शुरू हुआ तो बेटियों का दाखिला स्कूल में करा दिया, लेकिन अचानक अप्रैल से पैसा मिलना बंद हो गया, तो बेटियों को घर रहकर ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। पीड़ित ने बताया कि जब उसके पति की मौत हुई, तब उसकी बड़ी बेटी 14 साल और दूसरे नंबर की बेटी 13 साल की थी। दो अन्य बेटियां सात साल और तीन साल की थी। पति की मौत के सदमे के साथ ही बेटियों की परवरिश की चिंता ने मन को झकझोर दिया है। अब कुछ संबंधियों सहित बहन के सहयोग से बेटियों का पालन पोषण हो रहा है। छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर कुछ पैसे का इंतजाम हो जाता है, लेकिन इनके भविष्य को लेकर दिन रात चिंता लगी रहती है।
पढ़ने लिखने की उम्र में बड़े बेटे ने परवरिश का उठाया जिम्मा
कोरोना से जब पति की मौत हुई तो बड़ा बेटा अट्ठारह साल का था। मां की सेवा और दो छोटे भाइयों की परवरिश के साथ उनकी पढ़ाई का जिम्मा उठाने के लिए बेटे ने किराए पर ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। पति के गम में पीड़ित महिला अपनी दर्द भरी दास्तान सुनाते हुए फफक पड़ी। खलीलाबाद शहर के समीप स्थित एक गांव की रहने वाली महिला ने बताया कि जब उसके पति की कोरोना से मौत हुई तो परिवार और संबंधियों ने भी किनारा कर लिया। तीन बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई का जिम्मा उठाने में लाचार मां के लिए उसका बड़ा बेटा उम्मीद बन गया। मां की लाचारी देख पढ़ने लिखने की उम्र में बेटे ने किराए पर ई -रिक्शा लेकर परिवार के भरण-पोषण का जिम्मा उठाने को ठानी। पीड़ित मां ने बताया कि सीएम बाल सेवा योजना से पैसा अप्रैल से मिलना बंद हुआ तो माली हालत और खराब हो गई। दिन रात ई-रिक्शा चलाकर बेटा परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहा है। दोनों छोटे बच्चों की पढ़ाई के साथ दवा और भोजन का इंतजाम बमुशक्कत हो पाता है। काफी दिनों से योजना का पैसा न मिलने से दिक्कत हो रही है। बेटे की मेहनत के बावजूद घर का खर्चा चलना मुश्किल हो रहा है।
सीएम बाल सेवा योजना के लाभार्थियों के खाते में जल्द ही रकम भेजी जाएगी। इसके लिए शासन से बजट स्वीकृत हो गया है। वैसे रकम भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उम्मीद है कि एक सप्ताह में लाभार्थियों के खाते में रकम पहुंच जाएगी।
- डॉक्टर श्वेता त्रिपाठी, जिला प्रोवेशन अधिकारी