कर्मचारी नेताओं का आरोप, आंदोलन कर रहे कर्मियों को दी जा रही धमकी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। ऊर्जा मंत्री के साथ हुए समझौते को लागू करने के लिए बृहस्पतिवार को दूसरे दिन विद्युत कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना जारी रखा। विद्युत कर्मियों ने कहा कि जब तब समझौता लागू नहीं होगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर विद्युत कर्मी, जूनियर इंजीनियरों व संविदा कर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर धरना दिया। वक्ताओं ने कहा कि तीन दिसंबर 2022 को हुए समझौते में ऊर्जा मंत्री ने मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय मांगा था। तीन होने को हैं, लेकिन समझौते के प्रमुख बिंदुओं के क्रियान्वयन की दिशा में कदम नहीं उठाया गया। ओबरा, अनपरा की 800-800 मेगावाट की नई इकाइयों को उत्पादन निगम से छीन कर एनटीपीसी को देने, पारेषण के निजीकरण को रोकने व अन्य न्यायोचित मांगों के सार्थक समाधान की जगह शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे कर्मियों को धमकी दी जा रही है।
सह संयोजक सुनील प्रजापति ने कहा कि ऊर्जा निगम के चेयरमैन संयुक्त संघर्ष समिति व सरकार के बीच हुए समझौते को लागू करने से इन्कार कर रहे हैं। पंकज कुमार ने कहा कि ऊर्जा प्रबंधन न्याय संगत मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि बृहस्पतिवार की दस बजे से विद्युत कर्मी हड़ताल पर जाएंगे।
अवर अभियंता अमित सिंह ने कहा कि ऊर्जा निगमों में चेयरमैन व प्रबंध निदेशक के पदों पर समुचित चयन के बाद ही नियुक्त की जाए। धरने में मनोज कुमार, अरुण गुप्ता, प्रेम प्रकाश वर्मा, लक्ष्मण मिश्र, रविकांत, अवनीश कुमार, धनंजय सिंह, भानुप्रताप, चंद्रभूषण, बेचन प्रसाद, सन्नी देवोल प्रताप, राम करन, शैलेंद्र यादव आदि शामिल रहे।