संतकबीरनगर। गोरखपुर और लखनऊ की संयुक्त एंटी करप्शन टीम ने सोमवार को धौरहरा चौराहे पर 3000 रुपये रिश्वत लेते हुए प्रभारी चौकी इंचार्ज मगहर नसीबुद्दीन को रंगे हाथ पकड़ा। आरोप था कि प्रभारी चौकी इंचार्ज ने गड़सरपार निवासी अमृत सिंह से तहसील दिवस के प्रार्थना पत्र पर उनके पक्ष में रिपोर्ट लगाने के लिए रिश्वत मांग था। एंटी करप्सन के इंस्पेक्टर नरेंद्र गौड़ ने आरोपी दारोगा नसीबुद्दीन के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायतकर्ता गड़सरपार गांव निवासी अमृत सिंह का आरोप था कि उसका अपने सगे भाई गिरजेश सिंह उर्फ फलाहारी सिंह आदि से जमीन संबंधी बंटवारे का विवाद चल रहा है। उसी संबंध में उसने तीन जून 2014 को तहसील दिवस में शिकायती पत्र दिया था। शिकायती पत्र की जांच प्रभारी चौकी इंचार्ज मगहर नसीबुद्दीन को मिला था। आरोप था कि प्रभारी चौकी इंचार्ज नसीबुद्दीन उसके पक्ष में रिपोर्ट लगाने के लिए 10000 रुपये रिश्वत की मांग कर रहे थे। उसने जब उतनी रकम देने में असमर्थता जाहिर की तो दरोगा ने विपरीत में रिपोर्ट लगाने की धमकी दिया। बाद में 5000 रुपये में सौदा तय हुआ। 25 जून 2014 को उसने एसपी भ्रष्टाचार निवारण संगठन लखनऊ को एक आवेदन पत्र दिया था। गोरखपुर में तैनात एंटी करप्शन के इंसपेक्टर नरेंद्र गौड़, सबइंसपेक्टर सुरेंद्र पांडेय व टीम के सिपाही के अलावा लखनऊ में तैनात एंटीकरप्सन के इंसपेक्टर आर बी वर्मा, उमेशचंद्र मिश्र सोमवार को जिले में आए। एंटी करप्शन टीम के लोगों ने पहले डीएम से मिले। डीएम ने जे बाबू रघुवर प्रसाद और अहलमद धर्मेन्द्र कुमार को गवाह के रूप में टीम के साथ भेजा। इंस्पेक्टर नरेंद्र गौड़ ने बताया कि शिकायतकर्ता अमृत सिंह ने दरोगा नसीबुद्दीन को फोन करके रिश्वत की रकम देने के लिए धौरहरा चौराहे पर बुलाया। उसके पहले अमृत सिंह के पास मौजूद एक हजार के एक नोट और पांच-पांच सौ के चार नोट पर पाउडर लगा दिया गया था। दरोगा ने जैसे ही अमृत सिंह से रिश्वत में 3000 रुपये लिया वैसे ही टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। पकडे़ गए दरोगा को कोतवाली खलीलाबाद पुलिस की कस्टडी में दे दिया गया। इंस्पेक्टर नरेंद्र गौड़ ने दरोगा नसीबुद्दीन के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप में कोतवाली में मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। रिश्वत लेते दरोगा के पकडे़ जाने की खबर से पुलिस विभाग में सनसनी फैल गई।