संतकबीरनगर। पुलिस की कारगुजारी भी गजब की है। अपराध में अभ्यस्त हो चुके बदमाशों की अपराधिक गतिविधियों की निगरानी के लिए हिस्ट्रीशीट तो खोलती है, लेकिन उनके बारे में पता लगाना भूल जाती है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के 76 ऐसे हिस्ट्रीशीटर थे, जिनकी मृत्यु काफी पहले हो चुकी है, लेकिन पुलिस के अभिलेख में उन्हें जिंदा रखा गया था। निकाय चुनाव के मद्देनजर हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन कराया गया तो यह सच्चाई सामने आई।
अपराध करने में अभ्यस्त बदमाशों की निगरानी के लिए पुलिस हिस्ट्रीशीट खोलती है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में कुल 421 हिस्ट्रीशीटर हैं। उनमें 408 हिस्ट्रीशीटर अब ए श्रेणी के हैं और 13 बी श्रेणी के। एसपी ने हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन कराया। उनमें 317 हिस्ट्रीशीटर अपने घरों पर मौजूद मिले। 51 हिस्ट्रीशीटरों के दूसरे प्रदेशों में गए होने की जानकारी मिली। 24 हिस्ट्रीशीटर जेल में बंद हैं। इसके अलावा 24 हिस्ट्रीशीटर लापता पाए गए हैं। वहीं, 76 हिस्ट्रीशीटरों के बारे में जानकारी मिली कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। इसमें कोतवाली क्षेत्र के 20, दुधारा के 11, महुली के 26, मेंहदावल के 10, बखिरा के दो, बेलहरकला क्षेत्र के सात हिस्ट्रीशीटर शामिल थे।
सत्यापन करने वाली टीम में शामिल पुलिस कर्मियों के अनुसार, इनमें से कई ऐसे हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी मौत चार-पांच साल पहले हो गई थी। कुछ हिस्ट्रीशीटरों की मौत दो से लेकर सात महीने के भीतर हुई है। इसमें चौकाने वाली बात यह है कि बीट पुलिस अधिकारी के जरिए सूचनाएं जुटाने का कार्य पुलिस करती है। हल्का सिपाही और दरोगा भी क्षेत्र में जाते हैं। चौकीदार भी पुलिस की सूचना के प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन पुलिस हिस्ट्रीशीटरों के बारे में समय से जानकारी नहीं जुटा पाई और मर कर भी इतनी बड़ी संख्या में हिस्ट्रीशीटर पुलिस के रिकॉर्ड में जीवित रहे।
हिस्ट्रीशीटर की मृत्यु प्रमाणित होने पर थानों में नियुक्त बीट पुलिस अधिकारी व हल्का इंचार्ज के जरिए अपने क्षेत्र के हिस्ट्रीशीट की जांच की जाती है। जांच में यदि पाया जाता है कि हिस्ट्रीशीटर की मृत्यु हो चुकी है तो सबसे पहले परिजनों से इसकी पुष्टि की जाती है। इसके साथ ही ग्राम प्रधान व अन्य लोगों से भी जानकारी प्राप्त कर कार्रवाई पूर्ण की जाती है। हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी पुलिस समय- समय पर करती रहती है। हिस्ट्रीशीटरों के सत्यापन में 75 हिस्ट्रीशीटर मृतक पाए गए। उनका खाका नष्ट करा दिया गया है।
- सत्यजीत गुप्ता, एसपी