पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुड़ियारी।
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जिले के 260 परिषदीय स्कूलों का नहीं हो पाया कायाकल्प
- कई विद्यालयों में बजट के अभाव में कार्य प्रभावित
संतकबीरनगर। जिले के 260 ऐसे परिषदीय स्कूल हैं, जिनका कायाकल्प नहीं हो पाया है। इन स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है। इन्हीं में बच्चे बैठकर पठन-पाठन करते हैं। ऐसे में मॉर्डन स्कूल बनाने का दावा फेल साबित हो रहा है।
जिले के परिषदीय विद्यालयों को निजी स्कूलों के समान बेहतर करने के उद्देश्य से स्कूलों में कायाकल्प अभियान चलाया जा रहा है। जिले में 1247 परिषदीय स्कूल हैं। जिसमें 805 प्राथमिक, 192 उच्च प्राथमिक और 250 कंपोजिट विद्यालय हैं। इनमें से 260 ऐसे स्कूल हैं, जहां पर कायाकल्प का कार्य नहीं हो पाया है। खलीलाबाद के प्राथमिक विद्यालय द्वितीय का फर्श टूूटा हुआ है। साथ ही भवन भी जर्जर हालत में है। हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। इसी तरह से प्राथमिक विद्यालय सरैया में भी कायाकल्प अधूरा हुआ है। प्राथमिक विद्यालय पटखौली में बाउंड्रीवॉल तक नहीं है। यहां पर हमेशा जानवरों के आने का भय बना रहता है। इस तरह से जिले के 260 स्कूल कायाकल्प योजना से दूर हैं। जबकि विभाग हर स्कूलों में कायाकल्प योजना से आच्छादित करने का दावा भी कर रहा है। बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराया गया है। जिस स्कूलों में कायाकल्प योजना के तहत कार्य नहीं हुआ है, उसकी सूचना बनाकर सीडीओ को भेजी जा रही है ताकि वहां कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराया जा सके।