- अपराध रजिस्टर में दर्ज है नाम, महीनों से लापता हैं बदमाश
- दर्ज पते से चल रहे गायब, सक्रिय हुई पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। पुलिस के अपराध रजिस्टर में दर्ज 23 हिस्ट्रीशीटर लापता हैं। इनके बारे में न बीट सिपाहियों को पता है और न ही थानेदार ही जानते हैं। लंबे अर्से से इनकी खोज-खबर न होने से इन हिस्ट्रीशीटरों के बारे में पुलिस को कुछ जानकारी नहीं मिल पा रही है। और तो और रजिस्टर में जो पता दर्ज है वहां भी नहीं मिल रहे हैं। त्योहार बीतने के बाद अब हिस्ट्रीशीटरों का पता लगाने के लिए पुलिस एक बार फिर से सक्रिय हो गई है।
पुलिस थानों में जिनके खिलाफ मामले दर्ज होते हैं, पुलिस उन सभी का रिकॉर्ड रखती है। साथ ही उन बदमाशों का अलग से रिकॉर्ड होता है, जिन पर पांच से अधिक केस दर्ज होते हैं। इनकी विशेष निगरानी रखी जाती है। यह बदमाश कहां रहते हैं, क्या करते हैं, इसकी निगरानी की जिम्मेदारी बकायदा बीट सिपाहियों की होती है।
रजिस्टर में हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की दिन एवं रात दोनों टाइम की निगरानी दर्ज होती है, लेकिन रात में निगरानी पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद से अब सिर्फ दिन में निगरानी की जाती है। थाना पुलिस ने अब यह निगरानी भी बंद कर दी है। हालात यह है कि थानेदारों को भी अपने इलाके के हिस्ट्रीशीटर के बारे में जानकारी नहीं है।
लोकसभा चुनाव के दौरान जब पूरे जनपद के हिस्ट्रीशीटरों के नाम और पते खंगाले गए तब करीब 23 हिस्ट्रीशीटर अपने दर्ज नाम-पते पर नहीं पाए गए। करीब पांच माह बीत जाने के बावजूद इनका कोई सुराग पुलिस नहीं लगा सकी।
आसान नहीं होता हिस्ट्रीशीट खत्म कराना
पुलिस के लिए भी हिस्ट्रीशीटर बदमाशों की फाइल बंद करना आसान नहीं होता। अगर बदमाश ने जरायम की दुनिया से दूरी बना ली है, तब भी उनकी हिस्ट्रीशीट कभी बंद नहीं होती, वह खुली रहती है। उनकी मौत के बाद ही हिस्ट्रीशीट बंद होती है। इस हिस्ट्रीशीट को बंद करने के लिए लंबी प्रक्रिया अपनाई जाती है। संबंधित थाना क्षेत्र के सीओ ही हिस्ट्रीशीट फाड़कर उसे जलवाते हैं।
नवरात्र बीत गया है, अब अभियान चलाकर लापता 23 हिस्ट्रीशीटरों की खोज खबर ली जाएगी।
- सुशील कुमार सिंह, एएसपी