संतकबीरनगर। सेमरियावां क्षेत्र के चार गांवों में खसरे के प्रकोप बढ़ गया है। इन गांवों में 14 बच्चे खसरे से पीड़ित मिले हैं। गांव वालों की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची और बच्चों की सूची बनाई। उन्हें दवाएं दी गईं। शनिवार से स्वास्थ्य विभाग की टीम वृहद स्तर पर टीकाकरण करेंगी। गांव में फॉगिंग के साथ ही स्वच्छता अभियान भी चलेगा।
क्षेत्र के मूडाडीहाबेग में चार, तिलजा में दो, पिपरागोविंद में तीन और कोहरियावां में पांच बच्चे खसरे से पीड़ित बताए जा रहे हैं। शुक्रवार को गांव के लोगों ने सीएचसी सेमरियावां को सूचना दी तो गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। पीड़ित परिवार के घर जाकर जानकारी ली। बच्चों की सूची बनाई। खसरे से पीड़ित बच्चों में दवा का वितरण किया।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस रहमान ने बताया कि सेमरियांवा क्षेत्र के चार गांव में खसरे की सूचना मिली थी। इस सूचना के बाद टीम गांव में गई और बच्चों के नमूने लिए गए। बच्चों में खसरे की पुष्टि हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए इन गांवों के शून्य से पांच साल तक के सभी बच्चों की सूची तैयार कराई गई है। इसी सूची के आधार पर सभी बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम को गांव में निगरानी करने के लिए कहा गया है।
खसरे का लक्षण
सामान्य से तेज बुखार आना।
सूखी खांसी होना, लगातार नाक बहना।
गले में खराश बने रहना, आंखों में सूजन आना।
त्वचा पर छोटे-छोटे दाने निकल जाना।
इन पर खसरे का अधिक खतरा
टीकाकरण से वंचित बच्चे, विटामिन ए की कमी वाले बच्चे।
दो बार लगता है खसरे का टीका
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस रहमान ने बताया कि खसरे का टीका प्रत्येक बच्चे को नौ से 12 माह के बीच तथा 16 से 24 माह के बीच दो बार लगाया जाता है। अगर खसरे का आउटब्रेक ( प्रकोप ) होता है तो यह टीका एक बार और लगाया जाता है। खसरे की रोकथाम के लिए सभी इस क्षेत्र के स्वास्थ्य कर्मी नौ माह से पांच वर्ष तक बच्चों को खसरे का टीका अवश्य लगाएं।