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या हुसैन की सदाएं गूंजीं

सार

नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन के चेहल्लुम पर सिरसी और नूरियो सराय में शबीये जुलजुनाह के जुलूस निकाले गए।नोहा ख्वानी के बाद अजादारों ने इमाम बारगाह के सामने जंजीरी मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।जुलूस कर्बला मोहल्ला शर्की सादात पहुच कर समाप्त हुआ।
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Ya Hussein's everlasting echoes - फोटो : SAMBHAL
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विस्तार
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नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन के चेहल्लुम पर सिरसी और नूरियो सराय में शबीये जुलजुनाह के जुलूस निकाले गए। यह विभिन्न मार्गों से होकर गुजरे। मोहर्रम की दस तारीख को हजरत इमाम हुसैन को यजीद की जालिम फौज ने कर्बला में शहीद कर दिया था। उसके चालीसवें दिन चेहलुम मनाया जाता है।
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रविवार को इमाम बारगाह मोहल्ला गर्बी से हजरत इमाम हुसैन का शबीये जुलजुनाह का जुलूस निकाला गया। जुलूस में सवारी चौधरी बबर अली ने पढ़ी। जबकि अंजुमन महाफिजे अजा, हुसैनी, रौनकें अजा, बहारे अजा और अंजुमन शमीमे ईमान ने नोहा ख्वानी व सीना जनी की। जुलूस कर्बला मोहल्ला गर्बी पहुंचकर संपन्न हुआ। दूसरी ओर इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात से भी हजरत इमाम हुसैन का शबीये जुलजुनाह का जुलूस बरामद हुआ। जिसमें सवारी वकार मेहंदी, खुर्शीद हैदर और महताब हुसैन ने पढ़ी। जबकि अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, गुलदस्ते हैदरी, हाशमी, अंजुमन हैदरी, गुलजारे हुसैनी, पन्जेतनी, दिलदारे हुसैनी, कारवाने हुसैनी, सफीना-ए-अजा और अंजुमन मीसमे अजा ने नोहा पढ़ा और मातम किया। नोहा ख्वानी के बाद अजादारों ने इमाम बारगाह के सामने जंजीरी मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। मस्जिद सादात के सामने अजादारों ने दहकते हुए अंगारों पर मातम किया। जुलूस कर्बला मोहल्ला शर्की सादात पहुच कर समाप्त हुआ।
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