दरअसल, 25 जुलाई 2017 को समायोजन निरस्त होने के बाद से शिक्षामित्र का मानदेय 10 हजार रुपये प्रति माह ही है। इसमें छह वर्षों के बाद भी कोई वृद्धि नहीं की गई है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षामित्र लगातार प्रदर्शन कर रहे है। वे लखनऊ में प्रदर्शन कर मांगों को उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुई। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला प्रवक्ता रविंद्र कुमार खारी ने बताया कि सरकार ने शिक्षामित्र को शिक्षक के अनुपात में दिखाया जा रहा है। बेसिक शिक्षा मंत्री कई बार विधानसभा में इसकी जानकारी भी दे चुके हैं, लेकिन शिक्षकों के समान वेतन न देकर अल्प मानदेय पर ही काम कराया जा रहा है।
- उत्तर प्रदेश सरकार ने लिखित में जो शिक्षामित्र के साथ समझौता किया है, उस पर अमल करते हुए तत्काल शासनादेश जारी करें। शिक्षामित्र की सभी समस्याओं का समाधान सरकार करें। इसी उम्मीद के साथ शिक्षामित्र लखनऊ से घर वापस आए हैं। वहीं अगर सरकार ने जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं की तो वे लखनऊ में भूख हड़ताल करने को मजबूर होंगे।
- गिरीश यादव,
जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ
- अनुभव और पूरी शिक्षक योग्यता के बावजूद भी सिर्फ 10 हजार अल्प मानदेय में शिक्षामित्र अपने परिवार का गुजारा नहीं कर पा रहा है। उनके साथ सौतेले व्यवहार हो रहा है। शिक्षामित्र शिक्षक के बराबर शिक्षण कार्य कर रहे हैं, तो फिर वेतनमान भी समान मिलना चाहिए। साथ ही सरकार को 23 वर्ष से बेसिक शिक्षा में कार्य कर रहे शिक्षामित्र को नियमितीकरण कर देना चाहिए।
-रविंद्र खारी,
जिला प्रवक्ता, शिक्षामित्र संघ, संभल
- शिक्षामित्र सरकार से अपने सहायक अध्यापक पद की मांग लगातार कर रहा है। सरकार को शिक्षामित्र को पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देकर के गरीब, किसान और मजदूर के बेटों को पूर्णकालिक शिक्षक बना देना चाहिए। हम शिक्षामित्र संपूर्ण शिक्षक बनने की योग्यता रखते हैं।
- सत्यपाल सिंह यादव, ब्लॉक अध्यक्ष, शिक्षामित्र संघ पवांसा
- उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्र अपने पुराने पद सहायक अध्यापक पद पर समायोजित होना चाहते हैं। जिससे खोई हुई खुशी मिल सकें। दोबारा सरकार को शिक्षक बना देना चाहिए। -राजवती,
शिक्षामित्र
- समान कार्य समान वेतन की मांग कर रहे हैं। सरकार को समान कार्य के लिए समान वेतन दे देना चाहिए। क्योंकि हमारे पास पिछले 23 वर्षों का प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य करने का अनुभव है। -सीमा यादव,
शिक्षामित्र
- आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है। अपने जीवन के साथ-साथ बच्चों का भविष्य संभालने में भी सक्षम नहीं हो पा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह शिक्षामित्र के मानदेय को बढ़ाए और उन्हें नियमितिकरण करें। -सुमन कुमारी,
शिक्षामित्र, सुजातपुर