जनपद में करीब 1.40 लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। नवंबर के शुरुआत से किसान गेहूं की बुवाई शुरू कर देते हैं। हालांकि, 15 नवंबर से गेहूं की बुवाई में तेजी आती है। लेकिन, इस बार जब किसानाें ने बुवाई शुरू की तो डीएपी का संकट छा गया। गेहूं की बुवाई के लिए डीएपी मुख्य उर्वरक है। लेकिन, किसानों को पर्याप्त खाद न मिल पाने की वजह से किसानों की बुवाई पिछड़ रही है। जिले में 27 नवंबर को 2258 एमटी डीएपी आई थी। जिसे समितियों के माध्यम से अब तक वितरण किया जा रहा है।
प्रशासन का दावा है कि अब भी 500 एमटी खाद समितियों पर उपलब्ध है। इसके बावजूद जनपद की अधिकांश समितियों पर डीएपी के लिए मारामारी है। गुन्नौर स्थित कन्हुआ समिति पर तीन दिन से खाद नहीं है। किसान खाद के लिए परेशान हैं।
वहीं चंदौसी स्थित किसान इफ्को केंद्र पर भी डीएपी गायब है। जुनावई क्षेत्र की समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा समस्या गुन्नौर तहसील क्षेत्र में बनी हुई है। यहां अब भी 40 प्रतिशत किसान गेहूं की बुआई करने से रह गए हैं। किसान सुबह से लेकर शाम तक समितियों पर खाद के लिए परेशान होते रहते हैं। उनका कहना है कि अगर समय से खाद न मिली तो गेहूं की बुवाई लेट हो जाएगी।
- गेहूं की बुआई के लिए डीएपी की जरूरत है, लेकिन मंडी समिति के किसान केंद्र पर तीन दिन से खाद नहीं मिल रही। -वीर बहादुर, बलकरनपुर
- रबी की सीजन में हर बार डीएपी की किल्लत होती है। सरकार को किसानों की समस्या समझनी चाहिए। पर्याप्त खाद की व्यवस्था होनी चाहिए। -जयसिंह, रुस्तमपुर उगिया
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