बहजोई। नगलिया भूड़ में मकान का छज्जा गिरने से मलबे के नीचे दबकर सास-बहू की मौत हो गई। बहू ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि सास की दोबारा हालत बिगड़ने पर देर शाम अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब दोनों महिलाएं छज्जे के नीचे बैठकर आग पर हाथ सेंक रही थीं।
कोतवाली क्षेत्र के गांव नगलिया भूड़ में एक मकान के छज्जे की नीचे बैठकर कुछ लोग आग जलाकर हाथ सेंक रहे थे। इनमें दो सास-बहू भी थीं। अचानक मकान का छज्जा गिर गया और हाथ सेंक रहीं बहू जयवंती पत्नी भाय सिंह व सास मोहरकली पत्नी लाखन छज्जे के मलबे के नीचे दब गईं। आनन-फानन आसपास मौजूद लोगों ने दोनों महिलाओं के ऊपर से मलबा हटाया, लेकिन तब तक बहू जयवंती (50) दम तोड़ चुकी थी। वहीं सास मोहरकली घायल हो गई। घायल महिला को उपचार के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। देर शाम निजी अस्पताल से मोहरकली को डिस्चार्ज कर दिया गया। घर ले जाने के बाद एक बार फिर से मोहरकली की हालत बिगड़ गई। इसके बाद दोबारा अस्पताल लाते समय मोहरकली (75) ने दम तोड़ दिया। दोनों महिलाओं की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। ग्रामीण गमगीन रहे। आसपास के लोगों का कहना था कि पीड़ित परिवार को कुछ आर्थिक मदद मिल जाए, तो काफी राहत रहेगी। पूरे मामले में परिवार की ओर से कोई भी कानूनी कार्रवाई से परहेज किया गया।
बंदरों के कूदने से गिरा मकान का छज्जा
बहजोई। नगलिया भूड़ के ग्रामीणों का कहना था कि काफी पुराना मकान था। बैठक के रूप में उपयोग में लिया जा रहा था। मकान के छज्जे के ऊपर पशुओं के चारे के लिए कबाड़ रखा था। पास में ही एक पेड़ है। मकान के छज्जे के नीचे काफी समय से लोग इकट्ठा होकर सर्दी के मौसम में आग जलाकर हाथ सेंक लेते हैं। शनिवार को भी कई लोग छज्जे के नीचे आग जलाकर हाथ सेंक रहे थे।
कुछ लोग छज्जे की हद से बाहर थे। दोनों बहू-सास जयवंती व मोहरकली छज्जे के नीचे थीं। मकान के बराबर वाले पेड़ से बंदर छज्जे के ऊपर रखे कबाड़ पर कूद रहे थे। बंदरों के कूदने से अचानक छज्जा भर भराकर नीचे गिर गया और दोनों महिलाएं छज्जे के मलबे के नीचे दब गईं।