रामबेटी के बेटे मनवीर सिंह ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से हाथी पालने की परंपरा है। उनके पिता नत्थू सिंह भी हाथी पालते थे। नत्थू सिंह के निधन के बाद रामबेटी ने हाथियों की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका अपने हाथियों से बहुत लगाव था। वह उनकी खुराक, नहलाने और देखरेख का ध्यान रखती थीं। परिवार के लोग बताते हैं कि परमा और मोहन हाथी बुजुर्ग महिला की आवाज पहचानते थे।
रामबेटी के गहरे लगाव के कारण परिजनों ने दो पालतू हाथी को अंतिम विदाई में शामिल किया। शव यात्रा गांव से राजघाट गंगा घाट के लिए निकली। हाथी आगे चल रहा था और उसके पीछे सैकड़ों ग्रामीण थे। यह दृश्य देखकर सभी लोग भावुक हो गए। ग्रामीणों ने ऐसी अंतिम यात्रा पहली बार देखी थी। मनवीर ने बताया कि रामबेटी की इच्छा थी कि परिवार यह परंपरा जारी रखे। फिलहाल परिवार के पास दो हाथी हैं जिनकी देखभाल अगली पीढ़ी कर रही है।