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मालकिन की अंतिम यात्रा में शामिल हुए बेजुबान: आगे-आगे हाथी... पीछे बुजुर्ग की शव यात्रा, ऐसे दी सलामी

Thu, 08 Oct 2026 01:44 PM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, गवां (संभल)

सार

ब्योरा गांव में 74 वर्षीय रामबेटी की अंतिम यात्रा में उनके दो पालतू हाथी शामिल हुए। हाथियों ने सूंड उठाकर उन्हें अंतिम सलामी दी, जो परिवार की पीढ़ियों की परंपरा है।
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मालकिन की अंतिम यात्रा में शामिल हुए दो हाथी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रजपुरा क्षेत्र के गांव ब्योरा में बुधवार दोपहर अनोखी अंतिम यात्रा देखी गई। 74 वर्षीय रामबेटी का बुधवार की तड़के बीमारी के चलते निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार में दो पालतू हाथी शामिल हुए, जिसने सभी को भावुक कर दिया। कई गांव के ग्रामीण भी इस अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे। लोगों के बीच हाथी चर्चा का विषय रहे। हाथियों ने भी सूंड उठाकर रामबेटी को अंतिम सलामी दी।

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रामबेटी के बेटे मनवीर सिंह ने बताया कि उनके परिवार में कई पीढ़ियों से हाथी पालने की परंपरा है। उनके पिता नत्थू सिंह भी हाथी पालते थे। नत्थू सिंह के निधन के बाद रामबेटी ने हाथियों की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका अपने हाथियों से बहुत लगाव था। वह उनकी खुराक, नहलाने और देखरेख का ध्यान रखती थीं। परिवार के लोग बताते हैं कि परमा और मोहन हाथी बुजुर्ग महिला की आवाज पहचानते थे।
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रामबेटी के गहरे लगाव के कारण परिजनों ने दो पालतू हाथी को अंतिम विदाई में शामिल किया। शव यात्रा गांव से राजघाट गंगा घाट के लिए निकली। हाथी आगे चल रहा था और उसके पीछे सैकड़ों ग्रामीण थे। यह दृश्य देखकर सभी लोग भावुक हो गए। ग्रामीणों ने ऐसी अंतिम यात्रा पहली बार देखी थी। मनवीर ने बताया कि रामबेटी की इच्छा थी कि परिवार यह परंपरा जारी रखे। फिलहाल परिवार के पास दो हाथी हैं जिनकी देखभाल अगली पीढ़ी कर रही है।
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