चंदौसी। सच्ची मित्रता में न तो धन दौलत का महत्व होता है और न ही ऊंच-नीच का भेदभाव। यह बात गीता सत्संग भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शिवशंकर भारद्वाज ने कही। उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा के बीच की मित्रता का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा को सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
कथावाचक ने कहा कि सुदामा ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान के प्रति अपनी आस्था कभी कम नहीं होने दी। उन्होंने अपने जीवन की हर परिस्थिति को ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार किया। जब परिवार आर्थिक तंगी से जूझने लगा तो पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। साधारण वेशभूषा में पहुंचे सुदामा को देखकर द्वारपाल उन्हें पहचान नहीं सके, लेकिन जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण को अपने बालसखा के आगमन का समाचार मिला, वे राजसी मर्यादा छोड़ कर उनसे मिलने दौड़ पड़े।
कथा के दौरान भजनों का भी गायन हुआ। जिसे सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव से नृत्य करने लगे। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। कथा पंडाल में अन्य लोगों के साथ साथ विनय अग्रवाल, लवकुश गोगी, अनिल गोयल, विनोद गोयल, बिंटू शर्मा, रानी, हिमानी, मयंक अग्रवाल और अनीता शर्मा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।