चंदौसी। सीओ चंदौसी डॉ. प्रदीप कुमार का स्थानांतरण गुन्नौर सर्किल में किया गया है। पुलिस लाइन से सीओ संतोष कुमार को चंदौसी क्षेत्र की कमान सौंपी गई है। वहीं गुन्नौर सीओ डॉ. गणेश कुमार को क्षेत्राधिकारी पुलिस लाइन बनाया गया है। भाजपा नेता प्रेमपाल के षडयंत्र में जेल भेजे गए बेगुनाह को लेकर राज्यमंत्री गुलाब देवी ने शिकायत की थी। सीओ के स्थानांतरण को इसी से जोड़कर देखा गया है। हालांकि इसी कार्रवाई से पीड़ित पक्ष संतुष्ट नहीं है।
विदित हो कि भाजपा नेता प्रेमपाल सिंह ने साजिश के तहत अपने पड़ाेसी दिलीप, हेमंत और श्यामलाल को निर्दोष जेल भिजवाया था। जिसमें सीओ डॉ. प्रदीप कुमार और चंदौसी पुलिस पर सवाल उठे थे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर दोबारा जांच की गई, तब भाजपा नेता के षडयंत्र की कहानी खुली थी। इसके बाद तीनों बेगुनाहों को जमानत मिली। इसमें हेमंत और श्यामलाल 37 दिन तक जेल में रहे थे। जेल से छूटने के बाद निर्देशों ने पुलिस के जुल्म की दास्तां बयां की। दरअसल चंदौसी के मोहल्ला लोधियान के भाजपा नेता और राशन डीलर प्रेमपाल सिंह ने मोहल्ले की त्रिवेणी देवी की लाखों रुपये की जमीन हथियाने के लिए उनके बेटे दिलीप, हेमंत और पड़ोसी श्यामलाल को खुद को गोली मारने के झूठा षडयंत्र रचकर फंसाया था। जिसमें पुलिस ने 27 जुलाई की रात दिलीप, हेमंत और श्यामलाल को घर से सोते हुए उठाया। इसके बाद कोतवाली में लाकर पीटना शुरू कर दिया। साथ ही भाजपा नेता को गोली मारने का जुर्म जबरन कबूल कराया। यहां तक कि पुलिस ने अपने पास से तमंचा भी लगा दिया।इसके बाद जेल भेज दिया। आरोप है कि यह सब सीओ के कहने पर किया गया। त्रिवेणी देवी ने अपने बेटों को बचाने के लिए तमाम प्रयास किए। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद के आदेश पर दोबारा जांच हुई। तब भाजपा नेता के षडयंत्र का खुलासा हुआ। सामने आया कि भाजपा नेता ने प्राइवेट अस्पताल के कंपाउंडर से पीठ में गोली इंप्लांट कराई थी। इसके बाद तीनों लोगों को षडयंत्र के तहत फंसा दिया। जेल से छूटने के बाद राज्यमंत्री गुलाब देवी पीड़ितों से मिलीं। गुस्साए लोगोंं ने उनका घेराव कर सीओ को हटाने व कार्रवाई की मांग की थी। इस पर राज्यमंत्री ने एसपी से सीओ को हटाने व कार्रवाई की मांग की। करीब एक महीने बाद सीओ को चंदौसी से स्थानांतरण किया गया। पीड़ित दिलीप कहना है कि वह इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें न्याय नहीं मिला है।
सीओ के स्थानांतरण पर पीड़ित दिलीप ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला है। सीओ के कहने पर उन्हें निर्दोष होते हुए भी जेल भेजा गया। तीन दिन तक थाने में प्रताड़ित किया गया। अपने पास से फर्जी तमंचा भी लगाया। 37 दिन से अधिक जेल में बिताए। कहा कि सीओ पर कार्रवाई न कर उन्हें दूसरे क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसी उम्मीद वरिष्ठ अधिकारियों से नहीं थी।