संभल। यूपी जीएसटी द्वारा वादों की सुनवाई के लिए जारी हो रहे नोटिस और इनमें मिल रहीं विसंगतियों के विरोध में व्यापारियों ने राज्य कर कार्यालय पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। इनका समाधान कराने की मांग उठाई। व्यापारियों ने इस बाबत डिप्टी कमिश्नर लल्लनप्रसाद यादव को ज्ञापन भी सौंपा।
ज्ञापन में कहा है कि प्रदेश में एक जुलाई 2017 से जीएसटी व्यवस्था शुरू की गई थी। वर्ष-2017-18 की वार्षिक विवरणी के लिए सात फरवरी 2020 निर्धारित थी। इसके बाद तीन वर्ष कोरोना रहा। ऐसे समय का ब्याज मांगना और पेनाल्टी लगाना अमानवीय है। उत्तर प्रदेश में ही ऐसा किया जा रहा है। जबकि उस समय का ब्याज व पेनाल्टी पूर्णत माफ होनी चाहिए थी। लेकिन ऐसे वादों की सुनवाई के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। ब्याज की दर 18 फीसदी वार्षिक है, जबकि इसे छह प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए था। जीएसटी में धारा 73 के अंतर्गत पेनाल्टी की राशि को कर की राशि के 10 प्रतिशत और 10 हजार रुपये इन दोनों में से जो राशि कम हो वह निर्धारित की जाए। जिन व्यापारियों का जीएसटीआर-9 एवं जीएसटीआर 9 सी लागू नहीं होता, सो इन्हें नोटिस जारी नहीं किए जाएं। जिन मामलों में विसंगतियों का अंतर 5 हजार रुपये से कम है, उन्हें भी नोटिस जारी न किए जाएं और यह कर मांग निरस्त की जाए। इस दौरान संजय गुप्ता पोली, दीपक गुप्ता, निशिकांत तिवारी, हरिओम गंभीर, नीरज अग्रवाल, अरविंद कुमार, नमन अग्रवाल, श्रीओम चंद्रा, अनिल गुप्ता, हिमांशु कश्यप आदि रहे।