डीएम कोर्ट में अपील खारिज की
यह मकान अवैध घोषित किए जाने के बाद, इस आदेश के खिलाफ 17 मार्च 2026 को डीएम कोर्ट में अपील दाखिल की गई थी। डीएम कोर्ट ने 11 अगस्त 2026 के आदेश में इसे खारिज कर दिया था। कोर्ट ने अवैध निर्माण को गिराने के पुराने आदेश को बरकरार रखा है।
नहीं गिराया मकान तो प्रशासन गिराएगा और खर्चा भी वसूलेगा
प्रशासन ने नोटिस चस्पा करने के साथ ही 15 दिन के भीतर निर्माण स्वयं गिराने का निर्देश दिया है। आदेश में स्पष्ट है कि तय समय में निर्माण न गिराने पर नियत प्राधिकारी इसे ध्वस्त करा सकता है। ध्वस्तीकरण में आने वाला खर्च भू-राजस्व के बकाए की तरह वसूला जाएगा।
दो करोड़ रुपये से ज्यादा मकान में खर्च होने की चर्चा
मोहल्ला डेरा सराय में बने इस मकान पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने की चर्चा है। तीन मंजिला मकान का नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया। करीब 400 गज में बने इस मकान का अभी निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है। किराएदार आरिफ विधायक के करीबी हैं। वर्षों पहले यह जमीन मुतवल्ली ने दी थी।
वक्फ-अल-औलाद है जमीन
डीएम अंकित खंडेलवाल ने बताया कि वक्फ-अल-औलाद का अर्थ है कि जमीन/संपत्ति को वक्फ करके उसकी आय या लाभ वक्फकर्ता की संतान/परिवार के हित के लिए होता है। यह साधारण निजी जमीन की तरह बेचने या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। इसकी जिम्मेदारी वक्फकर्ता की संतान मुतवल्ली बनकर निभाती है।
विधायक बोले हमें नहीं पता किस जमीन पर बना था मकान
सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा कि हमारे दादा नवाब आशक हुसैन खां ने बहुत सी जमीनों को वक्फ वक्फ-अल-औलाद कर दिया था। जिसके वर्तमान में हम मुतवल्ली है। हमारी जमीनों पर तमाम लोगों ने मकान बना रखे हैं। किराया तक हम नहीं लेते हैं। अब यह तीन मंजिला मकान जो बना है यह जमीन हमारी है लेकिन निर्माण जिसने किया है यह उसकी जिम्मेदारी है। अभी हमें यह भी नहीं पता है कि यह जमीन कहां है। यह जानकारी कराई जाएगी।