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इस बार 25 जुलाई से शुरू हो रहा श्रावण मास, मंगलकारी होंगे चारों सोमवार

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संभल। देवों के देव महादेव के प्रिय श्रावण मास की शुरुआत 25 जुलाई रविवार से हो रही है। श्रावण मास का आरंभ श्रवण नक्षत्र से हो रहा है। इस दिन दोपहर बाद तीन बजकर 27 मिनट तक आयुष्मान योग है। ये योग रोगों से छुटकारा दिलाने के साथ ही भक्तों को लंबी आयु प्रदान कराएगा। श्रावण मास का समापन 22 अगस्त को धनिष्ठा नक्षत्र में होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा।
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शहर के ज्योतिषाचार्य आचार्य शोभित शास्त्री बताते हैं कि इस बार सावन की शुरुआत आयुष्मान योग में हो रही है और सावन के चारों सोमवार को बहुत ही मंगलकारी संयोग बन रहे हैं अर्थात इस बार सावन में भोलेनाथ की असीम कृपा की बारिश भक्तों पर होगी।
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा समाप्ति के पश्चात श्रावण माह का प्रारंभ होता है। आषाढ़ माह से ही वर्षा ऋतु का प्रारंभ हो जाता है और इसी माह की शुक्ल एकादशी के दिन देव सो जाते हैं। देवशयनी एकादशी से ही चतुर्मास का प्रारंभ हो जाता है।
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श्रावण माह से व्रत और साधना के चार माह अर्थात चातुर्मास प्रारंभ होते हैं। यह चार माह हैं- श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक। पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में शिव को प्राप्त करने हेतु युवावस्था में श्रावण महीने में निराहार रहकर कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न कर विवाह किया था। इसलिए यह माह विशेष है।
जिले के शिवालयों में श्रावण मास की तैयारियां शुरू
जिले के सभी नाथ मंदिरों में श्रावण मास की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कोविड प्रोटोकाल के तहत इस बार भी जलाभिषेक कराया जाएगा। संभल तहसील क्षेत्र के गांव गुमसानी स्थित झारखंडी महादेव मंदिर, फत्तेहपुर भाऊ स्थित प्रकटेश्वर महादेव मंदिर, बेरनी शिव मंदिर में तैयारियां शुरू हो गईं हैं। इन मंदिरों में दूर-दूर से जलाभिषेक करने के लिए आते हैं।
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इस बार सावन में होंगे चार सोमवार
-26 जुलाई (पहला सोमवार) घनिष्ठा नक्षत्र, सौभाग्य योग, वणिज करण
-2 अगस्त (दूसरा सोमवार) नवमी तिथि, कृतिका नक्षत्र, गर करण व सर्वाथ सिद्धि योग
-9 अगस्त (तीसरा सोमवार) श्लेषा नक्षत्र, वरियान योग, गर करण, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा
-16 अगस्त (चौथा सोमवार) अनुराधा नक्षत्र, ब्रह्म योग, यायीजय योग व सर्वार्थ सिद्घि योग
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