संभल। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के द्वारा की गई उद्घोषणा को लेकर मतभेद बढ़ता ही जा रहा है। जगद्गुरु ने श्री कल्कि कथा के दौरान मंगलवार को कहा था कि भगवान श्री कल्कि का जन्म बैसाख मास शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि को होगा। साथ ही ऐंचोड़ा कंबोह को कंबोज नगर से संबोधित किया था। इस उद्घोषणा को लेकर मतभेद बन गया है। शुक्रवार को संभल में हिंदू जागृति मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने कहा कि भगवान श्री कल्कि अवतार भूमि संभल के अलावा कहीं नहीं है। कल्कि जयंती की तिथि कोई दूसरी नहीं है। शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में अजय शर्मा ने संभल माहात्म्य, पुराण, शास्त्र, श्रीमद् भागवत आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य पुराण, कल्कि पुराण, श्रीमद् भागवत सहित सभी धार्मिक ऐतिहासिक ग्रंथ एक स्वर में कलियुग के अंतिम चरण में संभल को श्री कल्कि विष्णु भगवान की अवतरण भूमि बताते हैं। कहा कि श्रावण शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि में भगवान श्री कल्कि विष्णु का अवतार होगा। इसी दिन संभल में कल्कि जयंती का महापर्व मनाया जाता है।
धर्म ग्रंथों के स्वाध्यायी आचार्य प्रमोद कृष्णम जी भी इसी तिथि को जयंती मनाते हैं। ग्रंथों के अनुसार 68 तीर्थ 19 कूपों की धरती तथा गंगा व रामगंगा के मध्य क्षेत्र में, 24 कोसीय संभल परिक्रमा की परिधि में, संभल के तीन कोनों पर स्थित गौरवशाली शिवलिंग चंद्रेश्वर, भुवनेश्वर, संभलेश्वर के द्वारा बनी त्रिकोण भूमि में, हरिहर मंदिर की भूमि से युक्त संभल की पुण्य पवित्र धरा पर भगवान श्री कल्कि का अवतार होना है। बताया कि सभी पुराण,शास्त्र, ग्रंथ, इतिहास के जानकार राजनीतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, बौद्धिक जगत के सभी महारथी एक स्वर से संभल भूमि को कल्कि विष्णु अवतार स्थली मान चुके हैं। क्योंकि यही सच्चाई है। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जो दुनिया में भगवान श्री कल्कि का नाम प्रसिद्ध कर रहे हैं। उन्होंने भी अपने जीवन काल में आज तक उपरोक्त तिथि को ही कल्कि जयंती पर्व बताया भी है, मनाया भी है।
उन्होंने कहा कि 68 तीर्थ 19 कूपों के मध्य संभल के श्री विष्णुयश शर्मा नामक ब्राह्मण के परिवार में भगवान का अवतार स्वीकार भी किया है और प्रचारित भी। ऐसे में हिंदू जागृति मंच के सभी कार्यकर्ता एक मत से यह चाहते हैं कि किसी भी सशक्त माध्यम से सामाजिक आध्यात्मिक ऐतिहासिक मान्यता को अचानक रौंदना नहीं चाहिए, भ्रम फैलाना भी पाप होगा।