सीबीएसई और आईसीएसई विद्यालयों में एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के संचालन और चिह्नित बुक डिपो से किताबें खरीदने के मामले में 33 विद्यालयों पर 33 लाख का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही अभिभावकों से अधिक फीस वसूली की भी जांच की जा रही है। विद्यालयों से तीन साल की फीस का डाटा मांगा गया है। सीए द्वारा ऑडिट का परीक्षण कर रिपोर्ट जिला शुल्क नियामक समिति को सौंपी जाएगी। इसके बाद ही समिति द्वारा अगली कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
डीआईओएस श्यामा कुमार ने बताया कि अभिभावकों की शिकायत पर विद्यालयों में फीस वसूली की जांच कराई गई थी। जिला प्रशासन की ओर से चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) को तैनात कर इन विद्यालयों में फीस वसूली का ऑडिट कराया गया। डीआईओएस ने बताया कि इसको लेकर ऑडिट के लिए इन विद्यालयों को प्रारूप पत्र देकर तीन साल की फीस का डाटा मांगा गया था। अधिकांश विद्यालयों से डाटा उपलब्ध करा दिया गया है। अब इस प्रारूप का सीए की ओर से परीक्षण करने के बाद ये डाटा जिला शुल्क नियामक समिति को उपलब्ध करा दिया जाएगा। इसके बाद समिति की ओर से दिए गए निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निजी स्कूलों पर जुर्माने लगाने के निर्णय का व्यापार मंडल ने किया स्वागत
अखिल भारतीय युवा उद्योग व्यापार मंडल की एक बैठक का आयोजन रविवार को सीता रोड पर किया गया। जिसमें निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए उन पर एक लाख रुपये का डीएम द्वारा जुर्माना लगाने के निर्णय का स्वागत किया गया। संगठन के नगर अध्यक्ष अनुज वार्ष्णेय ने बताया कि बीते काफी समय से संगठन निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आंदोलन कर रहा है। निजी स्कूलों ने शिक्षा के मंदिर को व्यापार के लिए दुकान बनाकर रख दिया है। निजी स्कूल संचालकों के हौसले इतने बुलंद है कि वह खुलेआम अभिभावकों की जेबों पर डाका डाल रहे हैं। डीएम ने इन स्कूलों पर जुर्माना लगाकर एक एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस दौरान शुभम अग्रवाल, प्रदीप वार्ष्णेय, गणेश वार्ष्णेय, विक्की, रमाकांत, मोहित वार्ष्णेय, पवन माली, विक्की कश्यप आदि मौजूद रहे।