चंदौसी। रविवार को बहन के घर जाते हुए मृतक शाजेआलम बोला था कि दोपहर के बाद तक शबाना को लेकर वापस आ जाएगा। साथ बैठ कर खाना खाएंगे पर नियति को कुछ ओर मंजूर था। न तो शाजेआलम और शबाना लौटकर आई और न ही उसकी बेटियां परिवार के लोग शबाना और उसकी छोटी बेटी को देखने के लिए उत्सुक थे।
शाजेआलम मोहर्रम पर शिमला से छुट्टी लेकर घर आया था। डेढ़ पहले ही उसकी बहन शबाना ने बेटी जुबियानूर को जन्म दिया था। मोबाइल फोन पर तो सभी ने जुबियानूर के फोटो देख लिए थे। पर घर के सदस्य उससे मिलना चाह रहे थे। भाई के छुट्टी पर आने पर बहन भी मिलना चाहती थी। रविवार को मोहर्रम के दूसरे दिन ही सुबह शाजेआलम घर से बहन को लेने के लिए उसकी ससुराल देवीपुर नंगला गया था।
पत्नी खैरूलनिशा व अन्य परिजनों से कहा था कि वह दोपहर के बाद तक बहन और भांजी को लेकर आ जाएगा। तुम खाना तैयार रखना। साथ शाम को भी साथ बैठकर खाना खाएंगे। पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। भांजी से मिल तो लिया, पर उसे घर तक लेकर नहीं पहुंच सका। बीच रास्ते में ही शाजेआलम, बहन शबाना, उसकी भांजी जुनैरा, जुबियानूर पर मौत ने झपटा मार दिया। परिजन घर पर इंतजार ही करते रह गए।