असमोली(संभल)। संभल के गांव इकरोटिया में ग्रामीणों ने कोरोना संक्रमण के चलते हो रहीं मौतों से आहत होकर ईद नहीं मनाई। ग्रामीणों का कहना है कि ईद खुशियों का त्योहार है। इस बार यह त्योहार महामारी के बीच आया है। पूरे देश में हर रोज जानें जा रही हैं। ऐेसे में खुशियां कैसे मनाई जा सकती हैं।
ईद न मनाने के निर्णय पर सभी ग्रामीणों ने सहमति जताई। इसके बाद त्योहार नहीं मनाया गया। कोरोना महामारी के बीच यह ग्रामीणों की अनूठी पहल देखने को मिली है। शुक्रवार को कोरोना महामारी के बीच भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद का त्योहार मनाया। इस बीच गांव इकरोटिया में मानवता के हित में फैसला लिया गया। उन्होंने ईद की खुशियों को भी त्याग दिया और महामारी से निजात मिलने के बाद खुशी मनाने का निर्णय लिया है।
दरअसल गांव इकरोटिया में भी कई लोगों की कोरोना संक्रमण और लक्षणों के साथ मौतें हुई हैं। इससे गांव के लोग आहत हैं। गुरुवार को गांव के जिम्मेदार लोगों ने गांव की मस्जिद के इमाम अता अब्बास से मशवरा किया कि इस बार ईद क्यों मनाई जाए। जब गम का माहौल है तो खुशियों का त्योहार कैसे मनाया जा सकता है। इस पर चर्चा गांव के अन्य लोगों तक पहुंची तो सभी ने नहीं माने की सहमति जताई।
शुक्रवार को लोगों ने घरों में रहकर ईद की नमाज तो अदा की लेकिन त्योहार नहीं मनाया। न नए कपड़े पहने और न कोई सजावट की गई। गांव में अन्य दिनों की तरह ही माहौल नजर आया। ग्रामीणों ने महामारी से निजात के बाद खुशी मनाने की बात कही है। ईद की नमाज के बाद लोगों ने अपने घरों में कोरोना खात्मे के लिए दुआ भी की।