चंदौसी (संभल)। जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर के दावे को लेकर हुए सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में हत्या के आरोपी मुल्ला अफरोज व गुलाम के मुकदमे में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी की गवाही होनी थी, लेकिन आरोपियों के अधिवक्ता ने पुलिस अधिकारी की गवाही फिजिकल रूप से कराने की मांग की। शासकीय अधिवक्ता की ओर से शासनादेशों और सुरक्षा का हवाला देते हुए फिजिकल रूप से गवाही का विरोध किया। इस मामले में वीसी के माध्यम से गवाही के लिए जनपद न्यायाधीश ने सुनवाई के लिए आगामी 16 मई की तारीख दी है।
नवंबर 2024 में जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावे के बाद कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर दूसरी बार सर्वे के लिए पहुंचे तो हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान आगजनी, पथराव व जमकर फायरिंग हुई थी। हिंसा के दौरान गोली लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी। इसमें करीब 100 लोगों को जेल भेजा गयाा। इनमें पर्दे के पीछे रहकर हिंसा की साजिश रचने वाले शारिक साठा गैंग के मुल्ला अफरोज व गुलाम को हिंसा के दौरान दो लोगों की हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था।
मुल्ला अफरोज व गुलाम के खिलाफ दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 340 में सुनवाई चल रही है। इसमें 12 लोगों की गवाही हो चुकी है और अब तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी की गवाही होनी है। मंगलवार को जनपद न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में सुनवाई के दौरान आरापियों के अधिवक्ताओं की ओर से अनुज चौधरी को फिजिकल रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर गवाही देने की मांग की गई, जबकि जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने शासनादेश व चर्चित पुलिस अधिकारी की सुरक्षा का हवाला देते हुए वीसी के माध्यम से ही सुनवाई कराए जाने की दलील दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने वीसी के माध्यम से ही सुनवाई कराए जाने के लिए अगली तारीख 16 मई नियत कर दी है।