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Sambhal News: इमली पे आईं शोखियां...वसंत आ गया

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बहजोई। इमली पे आईं शोखियां वसंत आ गया, तेरे नाज ओ नखरे उठाते रहेंगे तथा दिल के दरवाजे पर हमको एक आहट चाहिए आदि एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर कवियों ने समां बांध दिया। मौका था, वसंत पंचमी पर कलक्ट्रेट के निकट स्थित भगवान परशुराम मंदिर परिसर में हुई काव्य गोष्ठी का।
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शुक्रवार को चंदौसी से आए कवि शिवदत्त संदल ने तेरे नाज ओ नखरे उठाते रहेंगे, तुझे जिंदगी हम निभाते रहेंगे सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। वहीं, कवि रमेश अधीर ने दिल के दरवाजे पे हमको एक आहट चाहिए, मौन अधरों पर तुम्हारे मुस्कराहट चाहिए, जो मिला दे दिल हमारे जन्म जन्मों के लिए, बस एक पल के वास्ते वो छटपटाहट चाहिए।
अध्यक्षता करते हुए चंदौसी से आईं कवयित्री आशा बिसारिया ने, इमली पे आईं शोखियां वसंत आ गया, झाड़ी पे पकीं बेरियां वसंत आ गया, मुख्य अतिथि रामपुर से आए कवि शिवकुमार चंदन ने, राष्ट्र सुरक्षा जागो हे प्रिय प्रहरी बनकर मत सोना, जयघोषों से निज भारत का जागे कोना-कोना, संभल के पवांसा से आए कवि ज्ञानप्रकाश उपाध्याय ने, मेरे भाग्य सवारें अब, संभल में पधारें अब, हरि राह निहारें अब, संभल में पधारें अब सुनाकर श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
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वहीं, काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए बहजोई के कवि दीपक गोस्वामी चिराग ने, श्लोक हो गीता का, मानस चौपाई हो, हर ग्रंथ में हे माता, तुम ही तो समाई हो, हे सुर दायिनी मां, जय हो, जय हो, जय हो, कवि वेंकट कुमार, शिक्षक सौरभकांत शर्मा, राजेश यादव, सत्यवीर सिंह उजाला, राजेंद्र आर्य, प्रदीप आर्य, विकास कुमार, अंजू आर्य, डॉ. सुनीता शंखवार तथा शालू राघव ने अपनी कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
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