मोहर्रम का चांद नजर आते ही शिया समुदाय शोक में डूब गया। रविवार को दिन भर घरों से लेकर इमामबाड़ों में या हुसैन या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम (अस.) की शहादत का जिक्र किया गया।
रविवार को पहले मोहर्रम था, शिया समुदाय शोक में डूब गया। घरों और इमामबाड़ों में अलम लगाकर मातमी सिलसिले का आगाज किया गया। नौहाख्वानी के बाद मजलिसें भी हुईं। गमजदा माहौल में महिलाओं ने भी घरों में मजलिसें कीं। महिलाओं ने शृंगार करना बंद कर दिया। नौहाख्वानी शुरू हो गई और शोक में काले कपड़े पहन लिए गए। मोहर्रम के पहले दिन सिरसी, नूरियो सराय, बुकनाला, इकरोटिया आदि में शिया समुदाय के लोगों ने मजलिसों का आयोजन किया। इमामबाड़ों में अलम लगाकर नौहाख्वानी की गई। मजलिसों का दौर शुरू हुआ, देर रात तक यह सिलसिला चलता रहा। मौलानाओं ने मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन अस. की शहादत की जिक्र किया। जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं और या हुसैन या हुसैन की सदाएं बुलंद हो गईं।