संभल। गांव ऐंचोड़ा कंबोह में चल रही सात दिवसीय श्री कल्कि कथा के चौथे दिन तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान कल्कि के जन्म के बाद यज्ञोपवीत संस्कार प्रसंग का बखान किया। जनेऊ के धागों का मर्म समझाया। कहा कि यह पवित्रता, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं, जो व्यक्ति को ज्ञान और नैतिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
बृहस्पतिवार को कल्कि कथा की शुरुआत निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज, झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति संजय मिश्रा, सरधना से भाजपा विधायक संगीत सोम, एसपी केके विश्नोई ने दीप जलाकर की। कथा में प्रवचन करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा सनातन धर्म में 16 संस्कार हैं। इसका विस्तार से बखान किया। बताया कि सतयुग में सोना, त्रेता में चांदी, द्वापर में तांबा और कलियुग में भगवान कल्कि का कपास का यज्ञोपवीत किया गया।
इस प्रसंग के बाद उन्होंने ऊं और जनेऊ के धागों का मर्म समझाया। अलग-अलग अर्थ बताए। बताया कि जनेऊ के धागों का मर्म धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक हैं। ईश्वर से अलग-अलग तरीके से इसे पहनने वाले प्राणी की रक्षा करते हैं। यह पवित्रता, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक हैं, जो व्यक्ति को ज्ञान, और नैतिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
यज्ञोपवीत संस्कार के बाद भगवान कल्कि के द्वारा मां से भिक्षा मांगने का वृतांत सुनाया। बताया कि भगवान कल्कि ने मां से मांगा कि जब-जब मैं इस धरती पर अवतार लूं, तुम मेरी माता बनना यही मेरी भिक्षा होगी।
इस दौरान रामभद्राचार्य महाराज के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास जी महाराज, अवधेशानंद जी महाराज, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री बेबी रानी मौर्य, त्यागी कृष्णानंद महाराज, कल्याणदेव महाराज, राम बालकदास महाराज, साध्वी संतोष, हरमनोज दास, खिलेंद्र चाहल, त्यागी अशोका कृष्णम, सुभाष चंद्र शर्मा आदि रहे।
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2014 से पहले देश में तुष्टीकरण की नीति भी सनातन को खत्म नहीं कर पाई
संभल। गांव ऐंचोड़ा कंबोह में श्री कल्कि कथा सुनाने आए तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि छोटे बालकों को यदि धर्म समझ नहीं आता तो इसमें मां-बाप का दोष है। खुद का जिक्र करते हुए कहा कि पांच वर्ष की आयु में उनके माता-पिता ने उन्हें गीता और सात वर्ष की आयु में रामचरितमानस कंठस्थ करा दी थी। संस्कृत पढ़ने से ग्रंथों को मूल रूप से समझने में मदद मिलेगी। साथ ही, सांस्कृतिक जड़ों और विरासत की गहरी समझ विकसित होगी। माता-पिता को श्रम करना चाहिए और उनकी उन्नति के लिए अपनी संतान पर ध्यान देना चाहिए। सरकार के भरोसे नहीं रहना चाहिए। बताया कि सनातन धर्म को खत्म करने की साजिशें होती रही हैं लेकिन इसे कोई खत्म नहीं कर पाया। उन्होंने मोहम्मद गौरी, महमूद गजनवी, चंदेल खां, मुगलों की कूटनीति, अंग्रेजों का जिक्र करते हुए यहां तक कहा कि 2014 से पहले देश में तुष्टीकरण की नीति भी सनातन को खत्म नहीं कर पाई। ऐसे में जरूरी है कि सभी को अपने देश, वंश, भेष और परिवेश पर गर्व करना चाहिए। यह सनातन है, इस कोई समाप्त नहीं कर सकता। संवाद