कैलादेवी धाम पर संभल नगर में पदयात्रा के लिए एकत्रित हो रही भीड़ रोकने पर इंस्पेक्टर और ऋषिराज
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संभल। शहर की शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए कोर्ट में दाखिल किए गए दावे का एक साल पूरा होने पर निकाली जाने वाली पदयात्रा व परिक्रमा को प्रशासन ने शुरुआती बिंदु पर ही रोक दिया। बुधवार सुबह कैलादेवी मंदिर पर जुटे साधु-संतों व श्रद्धालुओं को पुलिस ने निषेधाज्ञा (धारा 163) का हवाला देते हुए आगे नहीं बढ़ने दिया।
घोषणा के हिसाब से कैलादेवी मंदिर से हरिहर मंदिर बताई जा रही जामा मस्जिद तक पदयात्रा और फिर मस्जिद की परिक्रमा का कार्यक्रम तय था। इस आयोजन का आह्वान करने वाले कैलादेवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी ने कहा कि अब 19 नवंबर 2026 का इंतजार करेंगे, जरूरत पड़ी तो छह दिसंबर दोहराएंगे। हालांकि बाद में महंत ने पदयात्रा के स्थगन की घोषण कर दी। मौके पर मौजूद लोगों ने कैलादेवी मंदिर की सवा किलोमीटर परिक्रमा करके आयोजन को विराम दे दिया।
बुधवार की सुबह करीब 10 बजे से कैलादेवी मंदिर से पदयात्रा निकालने का एलान किया गया था। इसके जरिये सनातनियों को एकजुट करने और हरिहर मंदिर का दावा पेश किए हुए एक वर्ष पूरा होने पर परिक्रमा करने की अपील थी। इस जानकारी के बाद पुलिस-प्रशासन के अधिकारी सतर्क हो गए थे।
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने सुबह से ही संभल शहर में चौकसी बढ़ाने और जामा मस्जिद इलाके को छावनी में तब्दील करा दिया था। साथ ही ड्रोन से निगरानी शुरू करा दी। वहीं, कैलादेवी मंदिर के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाकर फोर्स तैनात की गई।
पदयात्रा निकलनी शुरू हुई तो पुलिस ने कैलादेवी मंदिर पर ही महंत व उनके साथ चल रहे साधु-संत व अन्य लोगों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इस पर बहस हुई, लेकिन पुलिस ने धारा 163 का हवाला देते हुए भीड़ आगे नहीं बढ़ने दी।
दोपहर करीब ढाई बजे महंत ने पदयात्रा स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस दौरान मौजूद लोगों ने सवा किलोमीटर कैलादेवी मंदिर की परिक्रमा करके विराम की घोषणा कर दी। इस बीच महंत ऋषिराज गिरी ने कहा कि अब वर्ष 2026 का इंतजार करेंगे। जरूरत पड़ी तो छह दिसंबर दोहराएंगे।