सिरसी। नौवीं मोहर्रम पर सिरसी में दिनभर अजादारी का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान हजरत अली अकबर की शहादत सुनकर अजादार खूब रोए। मातमी जुलूस निकाला गया। गमजदा महौल में इमाम बारगाह माकूफा से नवी मोहर्रम का मातमी जुलूस शुरू हुआ था।
मजलिसों में मौलाना एहतेशाम अली, मौलाना काजी हुसैन रजा, मौलाना मंजूर आलम, मौलाना मोहम्मद अब्बास, मौलाना शमीम आदि उलेमाओं ने कहा कि हजरत अली अकबर को कर्बला में तीन दिन का भूखा प्यासा रखकर बेदर्दी से कत्ल कर दिया था। शहादत का बयान सुनकर अजादार फूट-फूटकर रो पड़े।
नौवीं मोहर्रम का मातमी जुलूस शर्की सादात में मोटो वाली गली से बरामद हुआ। जुलूस में स्थानीय मातमी अंजुमनों ने नोहाख्वानी व सी जनी की। इमाम बारगाह माकूफा से भी हजरत अली अकबर का जुलजुनाह का जुलूस निकाला गया। उधर, करबला मोहल्ला सादात में दरगाह जैनब, दरगाह हजरत अब्बास अलमदार और दरगाह फात्मा जहरा पर ख्यामे हुसैनी के मंजर सजाए गए। जहां देर रात तक अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात से कर्बला सादात तक हजारों दीये रोशन किए गए।
मौलाना काजी हुसैन रजा ने कहा कि शबे आशूर को इमाम हुसैन अलेह ने अपने खेमे का चिराग बुझाकर अपने साथियों से कहा कि अगर कोई जाना चाहता है, तो अंधेरे में जा सकता है। जब उन्होंने चराग जलाया तो उनके सभी साथी मौजूद थे। इसी की याद में शबे आशूर को हजारों दिए रोशन किए गए।
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नूरियो सराय में जुलजुनाह का जुलूस निकला
संभल। नूरियो सराय के इमाम बारगाह नंबरदारान में हजरत अब्बास की शहादत के शोक में जुलजुनाह बरामद किया गया। इसमें अजादारों ने मातम व नोहाख्वानी की। शुक्रवार की देर रात में मजलिस आयोजित की गई। मजलिस के जुलजुनाह बरामद किया गया। जिसकी जियारत करने के लिए अजादारों उमड़ पड़े। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपने सहित 72 लोगों की शहादत देकर न सिर्फ इस्लाम, बल्कि इंसानियत को बचाया था। संवाद