संभल। सौतेली बेटियों से आरोपी नफरत करता था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने बालिकाओं को दीवार से तब तक पटका जब तक दो वर्षीय जन्नत की जान नहीं चली गई और दूसरी बालिका मन्तशा बेहोश नहीं हो गई। जब आरोपी को लगा कि दोनों बहनों की मौत हो गई है तो उसने कमरे का दरवाजा खोला। जब आरोपी कमरे में बेटियों को पटक रहा था तब बेबस मां अपनी बेटियों को बचाने की गुहार लगा रही थी। आसपास के लोगों ने आने में भी देर की और किसी ने दरवाजा तोड़कर बाहर नहीं निकाला। यदि किसी ने बेबस मां की पहली चीख सुनकर दरवाजा तोड़ दिया होता तो दो वर्षीय जन्नत की जान बच सकती थी। शाइस्ता ने बताया कि बेटियों को कमरे में लेकर जाने से पहले उसके साथ आरोपी ने मारपीट की थी। जब बेटियों को कमरे में ले गया तो दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। दीवारों से पटकने की आवाज आ रही थी। बेटियां चीख रही थीं और बेरहम पटक रहा था। शाईस्ता के अनुसार करीब दस मिनट तक बेटियों को दीवारों से पटका है। जब बेटियों के चीखने की आवाज आनी बंद हो गई तो आरोपी ने दरवाजा खोला। जब तक मन्नत की मौत हो गई थी और दूसरी मूकबधिर बेटी बेहोश पड़ी थी।