संभल।
बवाल मामले में गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने संभल में स्थित लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में 51 लोगों से लिखित बयान लिए हैं। करीब सात घंटे तक आयोग के सदस्य संभल में रहे। 20 से 25 लोगों से मौखिक भी जानकारी ली गई। टीम ने जामा मस्जिद और बवाल के क्षेत्रों को भी देखा। साथ ही जामा मस्जिद कमेटी से भी घटना की जानकारी ली।
मंगलवार की सुबह 11 बजे से न्यायिक जांच आयोग के सामने लोगों ने पहुंचना शुरू कर दिया था। न्यायिक जांच आयोग में रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी एके जैन व रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद सदस्य हैं। आयोग के सामने शाम पांच बजे तक 51 लोगों ने लिखित में बयान दर्ज कराए हैं। 20 से 25 लोगों ने मौखिक जानकारी दी है।
सदस्य एके जैन ने कहा कि अभी लिखित बयान लिए गए हैं। इसके बाद आयोग के सदस्य मुरादाबाद के लिए रवाना हो गए। अब अगले सप्ताह आयोग की टीम फिर संभल आएगी। आयोग के बयान लेने के दौरान गेस्ट हाउस पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। वही लोग अंदर भेजे गए हैं जो अपने लिखित में बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे थे। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई, एएसपी श्रीश्चंद्र भी आयोग के रवाना होने तक मौके पर मौजूद रहे।
अधिकारियों से घटनास्थल की जानकारी ली
करीब 10.30 बजे न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष और सदस्य संभल कोतवाली पहुंच गए थे। इसके बाद जामा मस्जिद पर पहुंचे। करीब 20 मिनट तक मस्जिद के अंदर जामा मस्जिद कमेटी से जानकारी ली। इसके बाद जामा मस्जिद के घटनास्थल के आसपास की जानकारी ली। इस दौरान साथ में मौजूद डीआईजी मुनिराज जी, डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई से भी सवाल किए। एसपी ने पूरी घटना के बारे में बारीकी से जानकारी दी। जहां-जहां भीड़ एकत्र थी और आगजनी तोड़फोड़ की थी उन स्थानों का भी निरीक्षण कराया। इसके बाद उस गली में भी न्यायिक जांच आयोग के सदस्य पहुंचे जहां विदेशी कारतूस और खोखे मिले थे।
बवाल के बाद गठित किया गया है न्यायिक आयोग
न्यायिक जांच आयोग का गठन 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल मामले में हुआ है। इस बवाल में पांच लोगों की जान गई थी। 29 पुलिसकर्मी और कई भीड़ में शामिल लोग घायल हो गए थे। आयोग का गठन होने के बाद अध्यक्ष और एक सदस्य ने घटनास्थल का मौका मुआयना किया था। इसके बाद ही आयोग ने लिखित में बयान व साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहा था। अब दूसरे दौरे के दौरान बयान लिए गए हैं।