मुरादाबाद। मैनाठेर कांड में हिंसक भीड़ का शिकार हुए तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह ने करीब तीन माह बाद अपने बयान विभागीय जांच में दर्ज कराए थे। जिसमें उन्होंने बताया था कि भीड़ ने उन्हें मरा समझकर छोड़ा था। दो घंटे तक वह घटनास्थल पर ही तड़पते रहे थे लेकिन डीएम मौके से चले गए थे और उन्होंने उच्च अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी थी।
मैनाठेर बवाल में जख्मी हुए डीआईजी को साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें एम्स भेज दिया गया था। शासन के आदेश पर इस मामले की विभागीय जांच भी की गई थी। एम्स से ही उन्होंने अपना लिखित बयान भेजा था। जिसमें उन्होंने बताया कि वह छह जुलाई 2011 को डीएम राज शेखर के साथ गए थे। उनके साथ पूरा एस्कोर्ट था और डीएम के अर्दली और गनर थे। मैं काफिले में आगे चल रही डीएम की गाड़ी में बैठा था। डींगरपुर में लोग शोर शराबा कर रहे थे। गाड़ी रुकी और हम नीचे उतरे। मैं भीड़ को समझाने लगा लेकिन डीएम इतने में ही मिनट भर में गाड़ी में बैठकर भाग निकले। मैंने देखा कि डीएम की गाड़ी मुड़ रही थी। वह मुझसे कोई बातचीत या सलाह के ही वहां से चले गए। उनका अर्दली और गनर भी वहीं रह गया था। संभवत: कंफ्यूजन की वजह से मेरा एस्कोर्ट और ड्राइवर भी डीएम की गाड़ी के पीछे पीछे चले गए थे। मेरा पीआरओ भीड़ में छूट गया था। जबकि डीएम का गनर, मेरी एस्कोर्ट जिप्सी और अर्दली पैदल ही भाग गए थे। डीएम के मौके से भागने की वजह से भीड़ का मनोबल बढ़ गया। भीड़ ने मुझ पर हमलाकर दिया। मैंने फायर भी किया लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा था कि आधा घंटे में मुझे और मेरे पीआरओ को लहूलुहान कर दिया।
जानिए आईपीएस अशोक कुमार सिंह के बारे में
मुरादाबाद। मैनाठेर बवाल के दौरान प्रदेश में बसपा की सरकार थी। उस वक्त की मुख्यमंत्री ने जिले की कमान डीआईजी स्तर के अधिकारियों को सौंपी थी। यानी एसएसपी/डीआईजी जिले के कप्तान थे। यूपी के तेज तर्रार 1995 बैच के आईपीएस अशोक कुमार सिंह मुरादाबाद के कप्तान थे। वर्तमान में वह एडीजी हैं और लखनऊ में तैनात हैं। वह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं।