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बहुत खुशनसीब है वह बाप जिसकी पहली औलाद बेटी होती : मौलाना

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सिरसी। सिरसी के मोहल्ला शर्की मिठौली रोड पर लईक हसन के अजाखाने में मजलिस हुई। मजलिस में मौलाना मोहम्मद अब्बास ने कहा कि इल्म हासिल करो। उन्होंने कहा कि नबी-ए-करीम की नस्ल बेटों से नहीं बेटियों से चली।उन्होंने लड़कियों की अजमत और अहमियत बताते हुए कहा कि नबी ए करीम हजरत मोहम्मद मुस्तफा के दौर में सऊदी अरब में लड़की पैदा होने पर उसको जिंदा दफन कर दिया जाता था। नबी-ए-करीम ने इस प्रथा को समाप्त किया और कहा कि बहुत खुश नसीब है वह बाप जिसकी पहली औलाद बेटी होती है। बेटी घर की रहमत है। जिस घर में बेटी होती है, अल्लाह उस घर में बरकत अता करता है। लोगों में यह धारणा रहती है कि बेटे से उनकी नस्ल चलेगी जबकि नबी-ए-करीम की बेटी फात्मा जहरा से उनकी नस्ल चली। नबी-ए-करीम ने बेटी बचाने के साथ ही बेटियों को शिक्षा देने पर जोर दिया था। इसमें मर्सिया अजमल और उनके साथियों ने पढ़ा।
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मजलिस के बाद अलम मुबारक का जुलूस निकाला गया। इसमें असद अब्बास ने सवारी पढ़ी। अंजुमन जुल्फकारे हैदरी, अंजुमन गुलदस्ते हैदरी, अंजुमन हाशमी, अंजुमन हैदरी और अंजुमन कारवाने हुसैनी ने नोहाख्वानी और सीनाजनी की। जुलूस इमाम बारगाह शर्की सादात पहुंचकर संपन्न हुआ।
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